जब तेरे नैन मुस्कुराते हैं
ज़ीस्त के रंज भूल जाते हैं,
क्यूँ शिकन डालते हो माथे पर
भूल कर आ गए हैं जाते हैं,
कश्तियाँ यूँ भी डूब जाती हैं
नाख़ुदा किस लिए डराते हैं ?
एक हसीं आँख के इशारे पर
क़ाफ़िले राह भूल जाते हैं..!!
~अब्दुल हमीद अदम
अगरचे मैं एक चटान सा आदमी रहा हूँ
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