दुनियाँ बदल गई है, ज़माना बदल गया है
यहाँ जीने का अंदाज़ पुराना बदल गया है,
दोस्त अहबाब सारे ख़ुद गर्ज़ बने है जब से
वक़्त के साथ साथ ही याराना बदल गया है,
दौर में ज़दीद में खून के रिश्ते पानी हो रहे है
हर एक रिश्ता ख़ुद से ही बेगाना हो गया है,
फिर ये न कहना कि लैला तंग थी मजनू से
एक गलत फ़हमी है सब बयाना बदल गया है,
जब इश्क़ वही है तो आशिक़ न हो क्यूँ कर
सुन बे अक्ल के अंधे अब ज़माना बदल गया है,
हर एक दिल हुस्न के आगे घुटने टेक रहा है
टेके भी न क्यूँ कर कि माशिकाना बदल गया है,
ढूँढता फिरू कहाँ ? उसको अब ऐ दिल ए नादां
सुना है कि उसकी बस्ती, ठिकाना बदल गया है,
कल तक जिस पर नाज़ाँ था दिल नवाब अपना
आज वही शख्स ए जान ए जानां बदल गया है..!!
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