दिल यार का तख़्त हुआ ही नहीं

dil-yaar-ka-takht-hua-hi-nahin

दिल यार का तख़्त हुआ ही नहीं जीवन ख़ुश बख़्त हुआ ही नहीं, इसे तोड़ना भी तो नर्मी

कँवल जो वो कनार ए आबजू न हो

kanval-jo-wo-kanaar-e-aabjoo-na-ho

कँवल जो वो कनार ए आबजू न हो किसी भी अप्सरा से गुफ़्तुगू न हो, क़ज़ा हुआ है

कहानियों ने ज़रा खींच कर बदन अपने

kahaniyon-ne-zara-kheench-kar-badan-apne

कहानियों ने ज़रा खींच कर बदन अपने हरम सरा से बुलाया हमें वतन अपने, खुले गले की क़मीसें

सब्ज़ हिकायत सुर्ख़ कहानी

sabz-hiqayat-surkh-kahani

सब्ज़ हिकायत सुर्ख़ कहानी तेरे आँचल की मेहमानी, सहज सहज उस हुस्न का चलना उस पे अंधी शब

ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे

khyaal-tha-ki-tujhe-paa-ke-khud-ko-dhoondhenge

ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे तू मिल गया है तो ख़ुद अपनी ज़ात से

लहू में रंग ए सुख़न उस का भर के देखते हैं

lahoo-me-rang-e-sukhan-us-ka-bhar-ke-dekhte-hain

लहू में रंग ए सुख़न उस का भर के देखते हैं चराग़ बाम से जिस को उतर के

लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से

lahoo-rago-me-sambhaala-nahi-gaya-mujh-se

लहू रगों में सँभाला नहीं गया मुझ से किसी दिशा में उछाला नहीं गया मुझ से, सुडौल बाँहों

सर को आवाज़ से वहशत ही सही

sar-ko-aawaz-se-wahshat-hi-sahi

सर को आवाज़ से वहशत ही सही और वहशत में अज़िय्यत ही सही, ख़ाक ज़ादी तेरे उश्शाक़ बहुत

ये तेरे हुस्न का आवेज़ा जो महताब नहीं

ye-tere-husn-ka-aaveza-jo-mahtab-nahin

ये तेरे हुस्न का आवेज़ा जो महताब नहीं का’बा ए इश्क़ नहीं रौज़ा ए यक ख़्वाब नहीं, एक

है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए

hai-khushi-se-kis-tarah-gam-ka-khasaara-dekhiye

है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए आसमान ए यास पर उगता सितारा देखिए, आप गर