खाने को तो ज़हर भी खाया जा सकता है

khaane ko to zahar bhi khaya ja sakta hai

खाने को तो ज़हर भी खाया जा सकता है लेकिन उस को फिर समझाया जा सकता है, इस

लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं

log kahte hai ki is khel me sar jaate hain

लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं इश्क़ में इतना ख़सारा है तो घर जाते

तेरी अंजुमन में ज़ालिम अजब एहतिमाम देखा

teri anjuman me zaalim azab ehtimam dekha

तेरी अंजुमन में ज़ालिम अजब एहतिमाम देखा कहीं ज़िंदगी की बारिश कहीं क़त्ल ए आम देखा, मेरी अर्ज़

हंगामा ए ग़म से तंग आ कर इज़हार ए मसर्रत कर बैठे

hungaam e gam se tang aa kar

हंगामा ए ग़म से तंग आ कर इज़हार ए मसर्रत कर बैठे मशहूर थी अपनी ज़िंदादिली दानिस्ता शरारत

जीने वाले क़ज़ा से डरते हैं

jine wale kaza se darte hai

जीने वाले क़ज़ा से डरते हैं ज़हर पी कर दवा से डरते हैं, ज़ाहिदों को किसी का ख़ौफ़

वो हम से दूर होते जा रहे हैं

wo hum se door hote jaa rahe hai

वो हम से दूर होते जा रहे हैं बहुत मग़रूर होते जा रहे हैं, बस एक तर्क ए

मेरी ज़िंदगी है ज़ालिम तेरे ग़म से आश्कारा

meri zindagi hai zalim tere gam se ashkaara

मेरी ज़िंदगी है ज़ालिम तेरे ग़म से आश्कारा तेरा ग़म है दर हक़ीक़त मुझे ज़िंदगी से प्यारा, वो

कोई आरज़ू नहीं है कोई मुद्दआ नहीं है

koi aarzoo nahin hai koi muddaa nahi hai

कोई आरज़ू नहीं है कोई मुद्दआ नहीं है तेरा ग़म रहे सलामत मेरे दिल में क्या नहीं है

ग़म ए इश्क़ रह गया है ग़म ए जुस्तुजू में ढल कर

gam e ishq rah gaya hai gam e justazoo me dhal kar

ग़म ए इश्क़ रह गया है ग़म ए जुस्तुजू में ढल कर वो नज़र से छुप गए हैं

मेरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहीं

meri zindagi pe na muskura mujhe zindagi ka alam nahin

मेरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहीं जिसे तेरे ग़म से हो वास्ता वो ख़िज़ाँ