ज़र्द पत्तों पे मेरा नाम लिखा है उस ने
ज़र्द पत्तों पे मेरा नाम लिखा है उस ने सब्ज़ ख़्वाबों का ये अंजाम लिखा है उस ने,
Shayari
ज़र्द पत्तों पे मेरा नाम लिखा है उस ने सब्ज़ ख़्वाबों का ये अंजाम लिखा है उस ने,
क्या ख़बर थी ये दिन भी देखेंगे ख़ून बोएँगे सब्र काटेंगे, किस को मुंसिफ़ कहें किसे क़ातिल बच
ख़ुश हूँ कि मेरा हुस्न ए तलब काम तो आया ख़ाली ही सही मेरी तरफ़ जाम तो आया,
इश्क़ की चिंगारियों को फिर हवा देने लगे मेरे पास आ कर वो दुश्मन को दुआ देने लगे,
दिल के बहलाने की तदबीर तो है तू नहीं है तेरी तस्वीर तो है, हमसफ़र छोड़ गए मुझ
हुई हम से ये नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे ज़मीं की ख़ाक हो कर आसमाँ से दिल
याद में तेरी जाग जाग के हम रात भर करवटें बदलते हैं हर घड़ी दिल में तेरी उल्फ़त
दुखों में उस के इज़ाफ़ा भी मैं ही करता हूँ और इस कमी का इज़ाला भी मैं ही
ये तेरी ख़ल्क़ नवाज़ी का तक़ाज़ा भी नहीं कहीं दरिया है रवाँ और कहीं क़तरा भी नहीं, अपने
मसअला ख़त्म हुआ चाहता है दिल बस अब ज़ख़्म नया चाहता है, कब तलक लोग अंधेरे में रहें