ज़र्द पत्तों पे मेरा नाम लिखा है उस ने

zard patton pe mera naam likha hai us ne

ज़र्द पत्तों पे मेरा नाम लिखा है उस ने सब्ज़ ख़्वाबों का ये अंजाम लिखा है उस ने,

क्या ख़बर थी ये दिन भी देखेंगे

kya khabar thi ye din bhi dekhenge

क्या ख़बर थी ये दिन भी देखेंगे ख़ून बोएँगे सब्र काटेंगे, किस को मुंसिफ़ कहें किसे क़ातिल बच

ख़ुश हूँ कि मेरा हुस्न ए तलब काम तो आया

khush hoon ki mera husn e talab kaam to aaya

ख़ुश हूँ कि मेरा हुस्न ए तलब काम तो आया ख़ाली ही सही मेरी तरफ़ जाम तो आया,

इश्क़ की चिंगारियों को फिर हवा देने लगे

ishq ki chingaariyon ko fir hawa dene lage

इश्क़ की चिंगारियों को फिर हवा देने लगे मेरे पास आ कर वो दुश्मन को दुआ देने लगे,

दिल के बहलाने की तदबीर तो है

dil ke bahlaane ki tadbeer to hai

दिल के बहलाने की तदबीर तो है तू नहीं है तेरी तस्वीर तो है, हमसफ़र छोड़ गए मुझ

हुई हम से ये नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे

hui hum se ye nadaani teri mahfil me aa baithe

हुई हम से ये नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे ज़मीं की ख़ाक हो कर आसमाँ से दिल

याद में तेरी जाग जाग के हम रात भर करवटें बदलते हैं

yaad me teri jaag jaag ke hum raat bhar karwaten badalte hai

याद में तेरी जाग जाग के हम रात भर करवटें बदलते हैं हर घड़ी दिल में तेरी उल्फ़त

दुखों में उस के इज़ाफ़ा भी मैं ही करता हूँ

dukho me us ke izaafa bhi main hi karta hoon

दुखों में उस के इज़ाफ़ा भी मैं ही करता हूँ और इस कमी का इज़ाला भी मैं ही

ये तेरी ख़ल्क़ नवाज़ी का तक़ाज़ा भी नहीं

ye teri khalq nawazi ka takaza bhi nahin

ये तेरी ख़ल्क़ नवाज़ी का तक़ाज़ा भी नहीं कहीं दरिया है रवाँ और कहीं क़तरा भी नहीं, अपने

मसअला ख़त्म हुआ चाहता है

masla khatm hua chahta hai

मसअला ख़त्म हुआ चाहता है दिल बस अब ज़ख़्म नया चाहता है, कब तलक लोग अंधेरे में रहें