निगाह ए इल्तिफ़ात अब बदगुमाँ मालूम होती है

nigaah e iltifaat ab badgumaan malum hoti hai

निगाह ए इल्तिफ़ात अब बदगुमाँ मालूम होती है मेरी हर बात दुनिया को गिराँ मालूम होती है, तड़प

हम तो हर ग़म को जहाँ के ग़म ए जानाँ समझे

hum to har gam ko jahan ke gam e jaanaan samjhe

हम तो हर ग़म को जहाँ के ग़म ए जानाँ समझे जब बढ़ा नश्शा तो हम बादा ए

भड़काएँ मेरी प्यास को अक्सर तेरी आँखें

bhadkaaye meri pyas ko aksar teri aankhen

भड़काएँ मेरी प्यास को अक्सर तेरी आँखें सहरा मेरा चेहरा है समुंदर तेरी आँखें, फिर कौन भला दाद

मैं दिल पे जब्र करूँगा तुझे भुला दूँगा

main dil pe zabr karunga tujhe bhula dunga

मैं दिल पे जब्र करूँगा तुझे भुला दूँगा मरूँगा ख़ुद भी तुझे भी कड़ी सज़ा दूँगा, ये तीरगी

तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा

tum door ho to pyaar ka mausam na aayega

तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा अब के बरस बहार का मौसम न आएगा, चूमूँगा

भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे

bhala gamon se kahan haar jaane wale the

भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे हम आँसुओं की तरह मुस्कुराने वाले थे, हम ही ने

कभी झिड़की से कभी प्यार से समझाते रहे

kabhi jhidki se kabhi pyar se samjhaate rahe

कभी झिड़की से कभी प्यार से समझाते रहे हम गई रात पे दिल को लिए बहलाते रहे, अपने

इन्सान भूल चुका है इन्सान की क़ीमत

insan bhool chuka hai insan kee qeemat

इन्सान भूल चुका है इन्सान की क़ीमत बाज़ार में बढ़ गई आज हैवान की क़ीमत, इक्तिदार में आते

ज़िक्र ए शब ए फ़िराक़ से वहशत उसे भी थी

zikr e shab e firaq se wahshat use bhi thi

ज़िक्र ए शब ए फ़िराक़ से वहशत उसे भी थी मेरी तरह किसी से मोहब्बत उसे भी थी,

ये दिल ये पागल दिल मेरा क्यूँ बुझ गया आवारगी

ye dil ye pagal dil mera kyun bujh gaya awaragi

ये दिल ये पागल दिल मेरा क्यूँ बुझ गया आवारगी इस दश्त में एक शहर था वो क्या