यादें पागल कर देती हैं
यादें पागल कर देती हैं बातें पागल कर देती हैं, चेहरा होश उड़ा देता है आँखें पागल कर
Shayari
यादें पागल कर देती हैं बातें पागल कर देती हैं, चेहरा होश उड़ा देता है आँखें पागल कर
तेरा ख़याल बहुत देर तक नहीं रहता कोई मलाल बहुत देर तक नहीं रहता, उदास करती है अक्सर
देखे हुए किसी को बहुत दिन गुज़र गए इस दिल की बेबसी को बहुत दिन गुज़र गए, हर
आप की आँख अगर आज गुलाबी होगी मेरी सरकार बड़ी सख़्त ख़राबी होगी, मोहतसिब ने ही पढ़ा होगा
ख़ाली है अभी जाम मैं कुछ सोच रहा हूँ ऐ गर्दिश ए अय्याम मैं कुछ सोच रहा हूँ,
साक़ी शराब ला कि तबीअ’त उदास है मुतरिब रुबाब उठा कि तबीअ’त उदास है, रुक रुक के साज़
हँस के बोला करो बुलाया करो आप का घर है आया जाया करो, मुस्कुराहट है हुस्न का ज़ेवर
जब तेरे नैन मुस्कुराते हैं ज़ीस्त के रंज भूल जाते हैं, क्यूँ शिकन डालते हो माथे पर भूल
अगरचे मैं एक चटान सा आदमी रहा हूँ मगर तेरे बाद हौसला है कि जी रहा हूँ, वो
तेरे बदन से जो छू कर इधर भी आता है मिसाल ए रंग वो झोंका नज़र भी आता