अब इजाज़त दे कि मैं हूँ जाँ ब लब ऐ ज़िंदगी

ab ijazat de ki main hoon jaan ba lab ae zindagi

अब इजाज़त दे कि मैं हूँ जाँ ब लब ऐ ज़िंदगी मौत आती है बस अब हद्द ए

मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी

musalsal mujh pe ye teri inayat maar daalegi

मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी कभी फ़ुर्क़त कभी इस दर्जा क़ुर्बत मार डालेगी, ग़रीब ए

गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर

girne wali hai bahut jald ye sarkar huzoor

गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर हाँ नज़र आते हैं ऐसे ही कुछ आसार हुज़ूर, कारवाँ

रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर

rah gaya duniya me wo ban kar tamasha umr bhar

रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर जिस ने अपनी ज़िंदगी को खेल समझा उम्र

यूँ शहर के बाज़ार में क्या क्या नहीं मिलता

yun shahar ke bazaar me kya kya nahin milta

यूँ शहर के बाज़ार में क्या क्या नहीं मिलता पर हुस्न में सानी कोई तेरा नहीं नहीं मिलता,

सोचता हूँ मैं कि कुछ इस तरह रोना चाहिए

sochta hoon main ki kuch is tarah rona chahiye

सोचता हूँ मैं कि कुछ इस तरह रोना चाहिए अपने अश्कों से तेरा दामन भिगोना चाहिए, ज़िंदगी की

ख़त्म शोर ए तूफ़ाँ था दूर थी सियाही भी

khatm-shor-e-tufaan-tha-door-thi-siyaahi-bhi

ख़त्म शोर ए तूफ़ाँ था दूर थी सियाही भी दम के दम में अफ़्साना थी मेरी तबाही भी,

चमन है मक़्तल ए नग़्मा अब और क्या कहिए

chaman-hai-maqtal-e-nagma-ab-aur-kya-kahiye

चमन है मक़्तल ए नग़्मा अब और क्या कहिए बस एक सुकूत का आलम जिसे नवा कहिए, असीर

ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है

khanzar-kee-tarah-boo-e-saman-tej-bahut-hai

ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है मौसम की हवा अब के जुनूँ ख़ेज़ बहुत है,

इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए

is-baag-me-wo-sang-ke-qaabil-kaha-na-jaaye

इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए जब तक किसी समर को मिरा दिल कहा