वही बेबाकी ए उश्शाक़ है दरकार अब भी

wahi bebaki e ushshaaq hai darkar ab bhi

वही बेबाकी ए उश्शाक़ है दरकार अब भी है वही सिलसिला ए आतिश ओ गुलज़ार अब भी, अब

मआल ए अहल ए ज़मीं बर सर ए ज़मीं आता

maaal e ahal e zamin bar sar e zamin

मआल ए अहल ए ज़मीं बर सर ए ज़मीं आता जो बे यक़ीन हैं उन को भी फिर

गुज़र गई है अभी साअत ए गुज़िश्ता भी

guzar gayi hai abhi saaat e guzishta

गुज़र गई है अभी साअत ए गुज़िश्ता भी नज़र उठा कि गुज़र जाएगा ये लम्हा भी, बहुत क़रीब

हम पस ए वहम ओ गुमाँ भी देख लेते हैं तुझे

hum pas e waham o gumaan bhi dekh

हम पस ए वहम ओ गुमाँ भी देख लेते हैं तुझे देखने वाले यहाँ भी देख लेते हैं

हम अपने आप में रहते हैं दम में दम जैसे

ham apne aap me rahte hain

हम अपने आप में रहते हैं दम में दम जैसे हमारे साथ हों दो चार भी जो हम

जो अश्क बरसा रहे हैं साहिब

jo ashk barsa rahe hai sahib

जो अश्क बरसा रहे हैं साहिब ये राएगाँ जा रहे हैं साहिब, यही तग़य्युर तो ज़िंदगी है अबस

नज़र आ रहे हैं जो तन्हा से हम

nazar aa rahe hai jo tanha se ham

नज़र आ रहे हैं जो तन्हा से हम सो यूँ है कि भर पाए दुनिया से हम, न

ज़मीं पर आसमाँ कब तक रहेगा

zamin par aasmaan kab tak rahega

ज़मीं पर आसमाँ कब तक रहेगा ये हैरत का मकाँ कब तक रहेगा ? नज़र कब आश्ना ए

एक चेहरे पर रोज़ गुज़ारा होता है

ek chehre par roz guzara hota hai

एक चेहरे पर रोज़ गुज़ारा होता है प्यार किसी को कब दोबारा होता है मैं तुम पर हर

तुम्हारे आँसू कभी बहने न देंगे

tumhare aansoo kabhi bahne na denge

तुम्हारे आँसू कभी बहने न देंगे तुम्हे इस तरह उदास रहने न देंगे, तेरी नज़रों में हम बेवफ़ा