वही बेबाकी ए उश्शाक़ है दरकार अब भी
वही बेबाकी ए उश्शाक़ है दरकार अब भी है वही सिलसिला ए आतिश ओ गुलज़ार अब भी, अब
Sad Poetry
वही बेबाकी ए उश्शाक़ है दरकार अब भी है वही सिलसिला ए आतिश ओ गुलज़ार अब भी, अब
मआल ए अहल ए ज़मीं बर सर ए ज़मीं आता जो बे यक़ीन हैं उन को भी फिर
गुज़र गई है अभी साअत ए गुज़िश्ता भी नज़र उठा कि गुज़र जाएगा ये लम्हा भी, बहुत क़रीब
हम पस ए वहम ओ गुमाँ भी देख लेते हैं तुझे देखने वाले यहाँ भी देख लेते हैं
हम अपने आप में रहते हैं दम में दम जैसे हमारे साथ हों दो चार भी जो हम
जो अश्क बरसा रहे हैं साहिब ये राएगाँ जा रहे हैं साहिब, यही तग़य्युर तो ज़िंदगी है अबस
नज़र आ रहे हैं जो तन्हा से हम सो यूँ है कि भर पाए दुनिया से हम, न
ज़मीं पर आसमाँ कब तक रहेगा ये हैरत का मकाँ कब तक रहेगा ? नज़र कब आश्ना ए
एक चेहरे पर रोज़ गुज़ारा होता है प्यार किसी को कब दोबारा होता है मैं तुम पर हर
तुम्हारे आँसू कभी बहने न देंगे तुम्हे इस तरह उदास रहने न देंगे, तेरी नज़रों में हम बेवफ़ा