तक़दीर का शिकवा बे मअ’नी

taqdeer ka shikwa be maani

तक़दीर का शिकवा बे मअ’नी जीना ही तुझे मंज़ूर नहीं, आप अपना मुक़द्दर बन न सके इतना तो

निगाह ए साक़ी ए ना मेहरबाँ ये क्या जाने

nigaah e saaqee e na meharbaan ye kya jaane

निगाह ए साक़ी ए ना मेहरबाँ ये क्या जाने कि टूट जाते हैं ख़ुद दिल के साथ पैमाने,

गो रात मेरी सुब्ह की महरम तो नहीं है

go raat meri subah kee marham to nahi hai

गो रात मेरी सुब्ह की महरम तो नहीं है सूरज से तेरा रंग ए हिना कम तो नहीं

सू ए मक़्तल कि पए सैर ए चमन जाते हैं

soo e maqtal ki paye sair e chaman jaate hain

सू ए मक़्तल कि पए सैर ए चमन जाते हैं अहल ए दिल जाम ब कफ़ सर ब

रहते थे कभी जिन के दिल में हम

rahte the kabhi jin ke dil me hum

रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह, बैठे हैं उन्ही के

मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है

mujh se kaha jibril e junoon ne ye bhi vahee e ilaahi hai

मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है मज़हब तो बस मज़हब ए

हमें शुऊर ए जुनूँ है कि जिस चमन में रहे

humen-shuoor-e-junoon-hai-ki-jis-chaman-me-rahe

हमें शुऊर ए जुनूँ है कि जिस चमन में रहे निगाह बन के हसीनों की अंजुमन में रहे,

दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ

dushman ke dosti hai ab ahal e watan ke saath

दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ है अब ख़िज़ाँ चमन में नए पैरहन के

अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें

ab ahal e dard ye jeene ka ehtimam karen

अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें उसे भुला के ग़म ए ज़िंदगी का नाम करें,

मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए

mujhe sahal ho gayi manzilen wo hawa ke rukh bhi badal gaye

मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए तेरा हाथ हाथ में आ गया