बड़ा बेशर्म ज़ालिम है, बड़ी बेहिस…

bada besharm zalim hai badi behis fitrat hai

बड़ा बेशर्म ज़ालिम है, बड़ी बेहिस फ़ितरत है उसको कहाँ पता हया क्या ? क्या शराफ़त है, हमें

जी भर कर रोने को करता है दिल…

jee bhar kar rone ko karta hai dil

जी भर कर रोने को करता है दिल आज पलकें भिगोने को करता है दिल, नहीं मालूम कुछ

इलाज़ ए शीशा ए दिल करूँ मिले…

ilaz e shisha e dil karoon mile jo sishagar koi

इलाज़ ए शीशा ए दिल करूँ मिले जो शीशा गर कोई कोई मिला नहीं इधर, मिलेगा क्या उधर

वो इंसाँ जो शिकार ए गर्दिश ए अय्याम…

wo-insaan-jo-shikar

वो इंसाँ जो शिकार ए गर्दिश ए अय्याम होता है भला करता है दुनिया का मगर बदनाम होता

ज़िक्र उस परीवश का और फिर बयां अपना

ziqr-us-pariwash-ka

ज़िक्र उस परीवश का और फिर बयां अपना बन गया रकीब आख़िर था जो राज़दां अपना, मय वो

यहाँ किसी को आवाज़ कहाँ उठाने…

yahan-kisi-ko-aawaz

यहाँ किसी को आवाज़ कहाँ उठाने देता है कोई ज़रा सी आवाज़ करो तो गला दबा देता है

कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में…

kahan-le-jaaoon-dil

कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में इसकी मुश्क़िल है यहाँ परियों का मजमा है, वहाँ हूरों की

ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है

ye-jo-hasil-hame

ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है ये भी तो अपनी जगह एक परेशानी है, ज़िंदगी

बुझ गई आँख तेरा इंतज़ार करते करते

bujh-gayi-aankh-tera

बुझ गई आँख तेरा इंतज़ार करते करते टूट गए हम एक तरफ़ा प्यार करते करते, क़यामत है इज़हार

ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते

ye-aur-baat-hai

ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते जो ज़ख़्म तू ने दिए हैं भरा नहीं करते,