एक पल में ज़िंदगी भर की उदासी दे गया

ek pal me zindagi bhar ki udasi de gaya

एक पल में ज़िंदगी भर की उदासी दे गया वो जुदा होते हुए कुछ फूल बासी दे गया,

दिल में बंदों के बहुत ख़ौफ़ ए ख़ुदा था पहले

dil me bando ke bahut khauf e khuda tha pahle

दिल में बंदों के बहुत ख़ौफ़ ए ख़ुदा था पहले ये ज़माना कभी इतना न बुरा था पहले,

कभी पहली बार स्कूल जाने में डर लगता था

kabhi pahli baar school jaane me dar lagta tha

कभी पहली बार स्कूल जाने में डर लगता था आज अकेले ही ज़माना घूम लेते हैं, पहले फर्स्ट

जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रस्ता सुनसान हुआ

jab se us ne shahar ko chhoda har rasta sunsan hua

जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रस्ता सुनसान हुआ अपना क्या है सारे शहर का एक

हर एक शक्ल में सूरत नई मलाल की है

har ek shakl me surat nayi malal kee hai

हर एक शक्ल में सूरत नई मलाल की है हमारे चारों तरफ़ रौशनी मलाल की है, हम अपने

सुख़न के शौक़ में तौहीन हर्फ़ की नहीं की

sukhan ke shauq me tauheen harf ki nahi kee

सुख़न के शौक़ में तौहीन हर्फ़ की नहीं की कि हम ने दाद की ख़्वाहिश में शाएरी नहीं

इश्क़ गर हाथ छुड़ाए तो छुड़ाने देना

ishq gar haath chhudaye to chhudane dena

इश्क़ गर हाथ छुड़ाए तो छुड़ाने देना कार ए वहशत पे मगर आँच न आने देना, यूँ भी

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

sarfaroshi ki tamanna ab humare dil me hai

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ू ए क़ातिल में है, ऐ

मज्लिस ए ग़म, न कोई बज़्म ए तरब, क्या करते

mazlis e gam na koi bazm e tarab kya karte

मज्लिस ए ग़म, न कोई बज़्म ए तरब, क्या करते घर ही जा सकते थे आवारा ए शब,

वो चराग़ ए जाँ कि चराग़ था कहीं रहगुज़ार में बुझ गया

wo charag e jaan ki charag tha khin rahguzar me bujh gaya

वो चराग़ ए जाँ कि चराग़ था कहीं रहगुज़ार में बुझ गया मैं जो एक शो’लानज़ाद था हवस