हाए लोगों की करम फ़रमाइयाँ…

haay logo ki karam farmaaiyan

हाए लोगों की करम फ़रमाइयाँ तोहमतें बदनामियाँ रुस्वाइयाँ, ज़िंदगी शायद इसी का नाम है दूरियाँ, मजबूरियाँ, तन्हाइयाँ, क्या

फूल,खुशबू, कली की बात करें

fool khushboo kali ki baat kare

फूल,खुशबू, कली की बात करें प्यार की, आशिकी की बात करें मौत का खौफ़ भूल कर यारो क्यूँ

जब से तेरी हर बात में रहने लगे

jab se teri har baat me rahne lage

जब से तेरी हर बात में रहने लगे दुश्मन मेरे औक़ात में रहने लगे, ये बात भी उनको

कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से…

kahani dard o gam ki zindagi se kya kahta

कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से क्या कहता ? सबब ए रंज़ ओ गम जो है उसी

किया इश्क था जो बाइसे रुसवाई बन गया

kiya ishq tha jo baaise ruswai ban gaya

किया इश्क था जो बाइसे रुसवाई बन गया यारो तमाम शहर तमाशाई बन गया, बिन माँगे मिल गए

तजुर्बे के दम पर दीवानों ने कहा था इश्क़ बुरा है

tazrube-ke-dam-par

तजुर्बे के दम पर दीवानों ने कहा था इश्क़ बुरा है मगर जुनूँ ए इश्क़ में ये बात

बस एक बार किसी ने गले लगाया था

bas ek baar kisi ne gale lagaya tha

बस एक बार किसी ने गले लगाया था फिर उस के बाद न मैं था न मेरा साया

किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई ऐ मेरे ख़ुदा

kis simt chal padi hai khudaai ae mere khuda

किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई ऐ मेरे ख़ुदा नफ़रत ही दे रही है दिखाई ऐ मेरे ख़ुदा,

हक़ीर जानता है इफ्तिखार माँगता है

haqir jaanta hai iftikhar maangta hai

हक़ीर जानता है इफ्तिखार माँगता है वो ज़हर बाँटता है और प्यार माँगता है, ज़लील कर के रख

ये बेड़ियाँ मेरे पाँव में तुम पहना तो रहे हो

ye bediyan mere paanv me tum pahna to rahe ho

ये बेड़ियाँ मेरे पाँव में तुम पहना तो रहे हो फिर अहद भी ख़ुद ही तोड़ के जा