जिसके साथ अपनी माँ की दुआ होती है

jiske sath apni maan ki duaa hoti hai

जिसके साथ अपनी माँ की दुआ होती है उसके मुक़द्दर में जन्नत की हवा होती है, जिन्हें माँ

फूल का शाख़ पे आना भी बुरा लगता है

phool ka shaakh pe aana bhi bura lagta hai

फूल का शाख़ पे आना भी बुरा लगता है तू नहीं है तो ज़माना भी बुरा लगता है,

हर घड़ी चश्म ए ख़रीदार में रहने के लिए

har ghadi chasm e kharidaar me rahne ke liye

हर घड़ी चश्म ए ख़रीदार में रहने के लिए कुछ हुनर चाहिए बाज़ार में रहने के लिए, मैं

मुझपे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मेंरे साथ न चल

mujhpe hai saikdo ilzam mere saath na chal

मुझपे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मेंरे साथ न चल तू भी हो जाएगा बदनाम मेंरे साथ न चल, तू

परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है

paron ko khol zamaana udaan dekhta hai

परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है, मिला है हुस्न

सभी कहें मेरे ग़मख़्वार के अलावा भी

sabhi kahe mere gamkhwar ke alawa bhi

सभी कहें मेरे ग़मख़्वार के अलावा भी कोई तो बात करूँ यार के अलावा भी, बहुत से ऐसे

वो दुश्मन ए जाँ जान से प्यारा भी कभी था

wo dushman e jaan jaan se pyara

वो दुश्मन ए जाँ जान से प्यारा भी कभी था अब किस से कहें कोई हमारा भी कभी

ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए

ye jo nang the ye jo naam the

ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए ये ख़याल ए पुख़्ता जो ख़ाम थे

पाबंदियों से अपनी निकलते वो पा न थे

pabandiyo se apni nikalte wo

पाबंदियों से अपनी निकलते वो पा न थे सब रास्ते खुले थे मगर हम पे वा न थे,

इस नाज़ इस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो

is naaz is andaz se tum haaye

इस नाज़ इस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो रोज़ एक ग़ज़ल हमसे कहलवाए चलो हो, रखना है