बात साक़ी की न टाली जाएगी
बात साक़ी की न टाली जाएगी कर के तौबा तोड़ डाली जाएगी, वो सँवरते हैं मुझे इस की
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बात साक़ी की न टाली जाएगी कर के तौबा तोड़ डाली जाएगी, वो सँवरते हैं मुझे इस की
अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का बस एक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का,
हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना,
हूँ मैं परवाना मगर शम्अ तो हो रात तो हो जान देने को हूँ मौजूद कोई बात तो
बहुत रहा है कभी लुत्फ़ ए यार हम पर भी गुज़र चुकी है ये फ़स्ल ए बहार हम
देखा जो हुस्न ए यार तबीअत मचल गई आँखों का था क़ुसूर छुरी दिल पे चल गई, हम
शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है, दफ़्न कर दो हमें
दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज
हम हैं और उन की ख़ुशी है आज कल ज़िंदगी ही ज़िंदगी है आज कल, ग़म का हर
उदासी आसमाँ है दिल मेरा कितना अकेला है परिंदा शाम के पुल पर बहुत ख़ामोश बैठा है, मैं