गिरफ़्ता दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने
गिरफ़्ता दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने ख़ुदा करे कोई तेरे सिवा न पहचाने, मिटी मिटी सी उमीदें
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गिरफ़्ता दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने ख़ुदा करे कोई तेरे सिवा न पहचाने, मिटी मिटी सी उमीदें
मैं उससे जुदा वो मुझसे जुदा ये दोनों बातें एक सी हैं, आकाश में चाँद भी तारे भी
यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है ? बचाए ख़ुदा शर की ज़द
जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी मैं तो आवाज़ हूँ आवाज़ की हिजरत कैसी ? सुनने वालों
रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में हम ने ख़ुश हो के भँवर बाँध लिए पाँव में,
हर चौक पे भाषण हैं, हर मंच पे क़सम का शोर पर रोटी की कतार में आज भी
फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आए फिर पत्तों की पाज़ेब बजी तुम याद आए, फिर
मुसलसल बेकली दिल को रही है मगर जीने की सूरत तो रही है, मैं क्यूँ फिरता हूँ तन्हा
गली गली मेरी याद बिछी है प्यारे रस्ता देख के चल मुझ से इतनी वहशत है तो मेरी
सफ़र ए मंज़िल ए शब याद नहीं लोग रुख़्सत हुए कब याद नहीं, अव्वलीं क़ुर्ब की सरशारी में