तू अपनी खूबियाँ ढूँढ…

tu-apni-khubiyan-dhoondh

तू अपनी खूबियाँ ढूँढ कमियां निकालने के लिए लोग हैं, अगर रखना ही है कदम तो आगे रख

तेरी यादें, तेरी बातें, तेरी ख़ामोशी, तेरा फ़िक्र

teri-yaaden-teri-baaten

तेरी यादें, तेरी बातें, तेरी ख़ामोशी, तेरा फ़िक्र तेरा ज़िक्र, अब सब कुछ आसान सा लगता है, तू

कुछ रोज़ से रोज़ शाम बस यूँ ही ढल जाती है

kuch-roz-se-roz

कुछ रोज़ से रोज़ शाम बस यूँ ही ढल जाती है बीती हुई यादो की शमाँ मेरे सिरहाने

मुहताज हमसफ़र की मसाफ़त न थी मेरी

muhtaz-hamsafar-ki-masafat

मुहताज हमसफ़र की मसाफ़त न थी मेरी सब साथ थे किसी से रिफ़ाक़त न थी मेरी, हक़ किस

नसीबो पर नहीं चलते, नजीरों पर नहीं चलते…

nasibo par nahi chalte laqiro par nahi chalte

नसीबो पर नहीं चलते, नजीरों पर नहीं चलते जो सचमुच में बड़े है वो लकीरों पर नहीं चलते,

कहीं क़बा तो कहीं आस्तीं बिछाते हुए

kahin qaba to kahin

कहीं क़बा तो कहीं आस्तीं बिछाते हुए मैं मर गया हूँ वफादारियाँ निभाते हुए, अज़ीब रात थी आँखे

आवाम भूख से देखो निढाल है कि नहीं ?

awaam bhookh se dekho

आवाम भूख से देखो निढाल है कि नहीं ? हर एक चेहरे से ज़ाहिर मलाल है कि नहीं

नहीं कि मुझ को क़यामत का ए’तिक़ाद नहीं…

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नहीं कि मुझ को क़यामत का ए’तिक़ाद नहीं शब-ए-फ़िराक़ से रोज़-ए-जज़ा ज़ियाद नहीं, कोई कहे कि शब-ए-मह में

बशर तरसते है उम्दा खानों को मौत पड़ती है हुक्मरानो को…

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बशर तरसते है उम्दा खानों को मौत पड़ती है हुक्मरानो को, ज़ुर्म आज़ाद फिर रहा है यहाँ बेकसों

एक तेज़ तीर था कि लगा और निकल गया

ek-tez-teer-tha

एक तेज़ तीर था कि लगा और निकल गयामारी जो चीख़ रेल ने जंगल दहल गया, सोया हुआ