चल निकलती हैं ग़म ए यार से बातें क्या क्या

चल निकलती हैं ग़म

चल निकलती हैं ग़म ए यार से बातें क्या क्या हम ने भी कीं दर ओ दीवार से

ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते

ऐसा है कि सब ख़्वाब

ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते जो आज तो होते हैं मगर कल नहीं होते, अंदर

अब तक यही सुना था कि बाज़ार बिक गए

अब तक यही सुना

अब तक यही सुना था कि बाज़ार बिक गए उनकी गली गए तो ख़रीदार बिक गए, लगने लगी

जैसा नज़र का शौक़ था वैसा न कर सका

ये ज़माने की वफ़ाएं

जैसा नज़र का शौक़ था वैसा न कर सका शहर करिश्मा साज़ तमाशा न कर सका, दुनिया ने

ये ज़माने की वफ़ाएं मेरे काम की नहीं

ये ज़माने की वफ़ाएं

ये ज़माने की वफ़ाएं मेरे काम की नहीं मुझे उसकी वफ़ा चाहिए किसी आम की नहीं, उसकी तो

हाल में अपने मगन हो फ़िक्र ए आइंदा न हो

हाल में अपने मगन

हाल में अपने मगन हो फ़िक्र ए आइंदा न हो ये उसी इंसान से मुमकिन है जो ज़िंदा

कभी अपने इश्क़ पे तब्सिरे कभी तज़्किरे रुख़ ए यार के

कभी अपने इश्क़ पे

कभी अपने इश्क़ पे तब्सिरे कभी तज़्किरे रुख़ ए यार के यूँही बीत जाएँगे ये भी दिन जो

ऐ जुनूँ कुछ तो खुले आख़िर मैं किस मंज़िल में हूँ

ऐ जुनूँ कुछ तो

ऐ जुनूँ कुछ तो खुले आख़िर मैं किस मंज़िल में हूँ हूँ जवार ए यार मैं या कूचा

और कोई दम की मेहमाँ है गुज़र जाएगी रात

और कोई दम की

और कोई दम की मेहमाँ है गुज़र जाएगी रात ढलते ढलते आप अपनी मौत मर जाएगी रात, ज़िंदगी

तो क्या ये तय है कि अब उम्र भर नहीं मिलना

तो क्या ये तय

तो क्या ये तय है कि अब उम्र भर नहीं मिलना तो फिर ये उम्र भी क्यों तुम