मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है

mujh se kaha jibril e junoon ne ye bhi vahee e ilaahi hai

मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है मज़हब तो बस मज़हब ए

हमें शुऊर ए जुनूँ है कि जिस चमन में रहे

humen-shuoor-e-junoon-hai-ki-jis-chaman-me-rahe

हमें शुऊर ए जुनूँ है कि जिस चमन में रहे निगाह बन के हसीनों की अंजुमन में रहे,

दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ

dushman ke dosti hai ab ahal e watan ke saath

दुश्मन की दोस्ती है अब अहल ए वतन के साथ है अब ख़िज़ाँ चमन में नए पैरहन के

अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें

ab ahal e dard ye jeene ka ehtimam karen

अब अहल ए दर्द ये जीने का एहतिमाम करें उसे भुला के ग़म ए ज़िंदगी का नाम करें,

मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए

mujhe sahal ho gayi manzilen wo hawa ke rukh bhi badal gaye

मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए तेरा हाथ हाथ में आ गया

किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे

kisi ne bhi to na dekha nigaah bhar ke mujhe

किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे गया फिर आज का दिन भी उदास कर

ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें

ye ruke ruke se aansoon ye dabi dabi see aahen

ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें यूँही कब तलक ख़ुदाया ग़म ए ज़िंदगी निबाहें,

शाम ए ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं

shaam e gam kee qasam aaj gamgeen hain

शाम ए ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम,

हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो

hum ko junoon kya sikhlaate ho

हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़्यादा, चाक किए हैं हम ने अज़ीज़ो

जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले

jala ke mishaal e jahan hum junoon sifaat chale

जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले जो घर को आग लगाए हमारे साथ चले, दयार