ख़ुशबू गुलों में तारों में ताबिंदगी नहीं

khushboo gulon me taaron

ख़ुशबू गुलों में तारों में ताबिंदगी नहीं तुम बिन किसी भी शय में कोई दिलकशी नहीं, जब तुम

नज़रों का मोहब्बत भरा पैग़ाम बहुत है

nazaron ka mohabbat bhara

नज़रों का मोहब्बत भरा पैग़ाम बहुत है मजबूर ए वफ़ा के लिए इनआम बहुत है, कुछ बादा ओ

जब हम हुदूद ए दैर ओ हरम से गुज़र गए

jab ham hudu e

जब हम हुदूद ए दैर ओ हरम से गुज़र गए हर सम्त उन का जल्वा अयाँ था जिधर

मुश्किल में है जान बहुत

mushkil me hai jaan

मुश्किल में है जान बहुत जान है अब हैरान बहुत,   उस पत्थर दिल इंसाँ पर होते रहे

अगर है मंज़ूर ये कि होवे हमारे सीने का दाग़ ठंडा

agar hai manzar ye

अगर है मंज़ूर ये कि होवे हमारे सीने का दाग़ ठंडा तो आ लिपटिए गले से ऐ जाँ

कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा

kahan aa ke rukne

कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा वो जो मिल गया उसे याद

चाँद का ख़्वाब उजालों की नज़र लगता है

chaand ka khwab ujaalo

चाँद का ख़्वाब उजालों की नज़र लगता है तू जिधर हो के गुज़र जाए ख़बर लगता है, उस

शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं

sham tak subah ki

शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं इतने समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं,

दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता

dukh apna agar hum

दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता, पहुँचा है

वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जाता

wo mere ghar nahin

वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जाता मगर इन एहतियातों से तअ’ल्लुक़ मर नहीं