भूले बिसरे हुए ग़म याद बहुत करता है

bhoole bisre hue gam

भूले बिसरे हुए ग़म याद बहुत करता है मेरे अंदर कोई फ़रियाद बहुत करता है, रोज़ आता है

ज़िंदगी से यही गिला है मुझे

zindagi se yahi gila

ज़िंदगी से यही गिला है मुझे तू बहुत देर से मिला है मुझे, तू मोहब्बत से कोई चाल

दीदार माहताब का शब भर नहीं हुआ

deedar mahtab ka shab

दीदार माहताब का शब भर नहीं हुआ रौशन मेंरे नसीब का अख़्तर नहीं हुआ, हर दम वही हुआ

हिज्र की धूप में छाओं जैसी बातें करते हैं

hizr ki dhoop me

हिज्र की धूप में छाओं जैसी बातें करते हैं आँसू भी तो माओं जैसी बातें करते हैं, रस्ता

अजल होती रहेगी इश्क़ कर के मुल्तवी कब तक

azal hoti rahegi ishq

अजल होती रहेगी इश्क़ कर के मुल्तवी कब तक मुक़द्दर में है या रब आरज़ू ए ख़ुदकुशी कब

जो हमारे सफ़र का क़िस्सा है

jo hamare safar ka

जो हमारे सफ़र का क़िस्सा है वो तेरी रहगुज़र का क़िस्सा है, सुब्ह तक ख़त्म हो ही जाएगा

जवानी ज़िंदगानी है न तुम समझे न हम समझे

jawani zindagani hai na

जवानी ज़िंदगानी है न तुम समझे न हम समझे ये एक ऐसी कहानी है न तुम समझे न

उस को भी हम से मोहब्बत हो ज़रूरी तो नहीं

us ko bhi ham

उस को भी हम से मोहब्बत हो ज़रूरी तो नहीं इश्क़ ही इश्क़ की क़ीमत हो ज़रूरी तो

सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतिबार आप के वादे पर कर लिया

saadgi to hamari zara

सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतिबार आप के वादे पर कर लिया बात तो सिर्फ़ एक रात की

बिछड़ के उन के हम इस एहतिमाल से भी गए

bichhad ke un ke

बिछड़ के उन के हम इस एहतिमाल से भी गए बयान ए ग़म से गए अर्ज़ ए हाल