मआल ए अहल ए ज़मीं बर सर ए ज़मीं आता

maaal e ahal e zamin bar sar e zamin

मआल ए अहल ए ज़मीं बर सर ए ज़मीं आता जो बे यक़ीन हैं उन को भी फिर

हम पस ए वहम ओ गुमाँ भी देख लेते हैं तुझे

hum pas e waham o gumaan bhi dekh

हम पस ए वहम ओ गुमाँ भी देख लेते हैं तुझे देखने वाले यहाँ भी देख लेते हैं

हम अपने आप में रहते हैं दम में दम जैसे

ham apne aap me rahte hain

हम अपने आप में रहते हैं दम में दम जैसे हमारे साथ हों दो चार भी जो हम

जो अश्क बरसा रहे हैं साहिब

jo ashk barsa rahe hai sahib

जो अश्क बरसा रहे हैं साहिब ये राएगाँ जा रहे हैं साहिब, यही तग़य्युर तो ज़िंदगी है अबस

नज़र आ रहे हैं जो तन्हा से हम

nazar aa rahe hai jo tanha se ham

नज़र आ रहे हैं जो तन्हा से हम सो यूँ है कि भर पाए दुनिया से हम, न

ज़मीं पर आसमाँ कब तक रहेगा

zamin par aasmaan kab tak rahega

ज़मीं पर आसमाँ कब तक रहेगा ये हैरत का मकाँ कब तक रहेगा ? नज़र कब आश्ना ए

एक चेहरे पर रोज़ गुज़ारा होता है

ek chehre par roz guzara hota hai

एक चेहरे पर रोज़ गुज़ारा होता है प्यार किसी को कब दोबारा होता है मैं तुम पर हर

तुम्हारे आँसू कभी बहने न देंगे

tumhare aansoo kabhi bahne na denge

तुम्हारे आँसू कभी बहने न देंगे तुम्हे इस तरह उदास रहने न देंगे, तेरी नज़रों में हम बेवफ़ा

क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला ?

kya kare meri masihaai bhi karne wala

क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला ? ज़ख़्म ही ये मुझे लगता नहीं भरने वाला, ज़िंदगी से

मैं शाख़ से उड़ा था सितारों की आस में

main shaakh se uda tha sitaron ki

मैं शाख़ से उड़ा था सितारों की आस में मुरझा के आ गिरा हूँ मगर सर्द घास में,