दर्द मिन्नत कश ए दवा न हुआ…

dard-minnat-kash-e

दर्द मिन्नत कश ए दवा न हुआ मैं न अच्छा हुआ, बुरा न हुआ, जमा करते हो क्यूँ

तेरी हर बात चल कर भी यूँ मेरे जी से आती है

तेरी हर बात चल

तेरी हर बात चल कर भी यूँ मेरे जी से आती है कि जैसे याद की ख़ुशबू किसी

समझे वही इसको जो हो दीवाना…

samjhe-wahi-isko-jo

समझे वही इसको जो हो दीवाना किसी का अकबर ये ग़ज़ल मेरी है अफ़साना किसी का, गर शैख़

कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में…

kahan-le-jaaoon-dil

कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में इसकी मुश्क़िल है यहाँ परियों का मजमा है, वहाँ हूरों की

बुझ गई आँख तेरा इंतज़ार करते करते

bujh-gayi-aankh-tera

बुझ गई आँख तेरा इंतज़ार करते करते टूट गए हम एक तरफ़ा प्यार करते करते, क़यामत है इज़हार

थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी

the-khwab-ek-hamare

थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी पर अपना खेल दिखाते रहे सितारे भी, ये ज़िंदगी है

वो ग़ज़ल वालों का उस्लूब समझते होंगे…

फ़सुर्दगी का मुदावा करें

वो ग़ज़ल वालों का उस्लूब समझते होंगे चाँद कहते हैं किसे ख़ूब समझते होंगे, इतनी मिलती है मेरी

वहशतें बिखरी पड़ी है जिस तरफ़ भी…

wahshate-bikhri-padi-hai

वहशतें बिखरी पड़ी है जिस तरफ़ भी जाऊँ मैं घूम फिर आया हूँ अपना शहर तेरा गाँव मैं,

क्या शर्त ए मुहब्बत है, क्या शर्त…

kya-shart-e-muhabbat

क्या शर्त ए मुहब्बत है, क्या शर्त ए ज़माना है ! आवाज़ भी ज़ख़्मी है मगर गीत भी

काँटो का एक मकान मेरे पास रह गया

kaanto-ka-ek-maqan

काँटो का एक मकान मेरे पास रह गया एक फूल सा निशान मेरे पास रह गया, सामान तू