आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई

aankh bhar aai jo kisi se mulaqat hui

आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई, दिन भी

अकेले रहने की सजा कबूल कर गलती…

akele rahne ki saza qubul kar galti tumne ki hai

अकेले रहने की सजा कबूल कर गलती तुमने की है मुझ पर यूँ ऐतबार न करने में भी

जिसे हो ख्वाहिश ए दुनियाँ उसे…

jise ho khwahish e duniyan use sansar mil jaaye

जिसे हो ख्वाहिश ए दुनियाँ उसे संसार मिल जाए मुझे तो फक़त तुम और तुम्हारा प्यार मिल जाए,

सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको

saari basti me jaadoo nazar aaye mujhko

सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको जो दरीचा भी खुले तू नज़र आए मुझको, सदियों का

उस गुल को भेजना है मुझे ख़त…

us gul ko bhejna hai mujhe khat saba ke saath

उस गुल को भेजना है मुझे ख़त सबा के हाथ इस वास्ते लगा हूँ चमन की हवा के

मैंने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है

maine muddat se koi khwab nahi dekha hai

मैंने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है रात खिलने का गुलाबों से महक आने का, ओस की

क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे

kya zamana tha ki ham roz mila karte the

क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे रात भर चाँद के हमराह फिरा करते थे, जहाँ

कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से…

kahani dard o gam ki zindagi se kya kahta

कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से क्या कहता ? सबब ए रंज़ ओ गम जो है उसी

दिल की बस्ती पे किसी दर्द का साया…

dil ki basti pe kisi dard ka saya bhi nahi

दिल की बस्ती पे किसी दर्द का साया भी नहीं ऐसा वीरानी का मौसम कभी आया भी नहीं,

फ़िराक़ ओ वस्ल से हट कर कोई रिश्ता…

firaq o vasl se hat kar koi rishta hamara ho

फ़िराक़ ओ वस्ल से हट कर कोई रिश्ता हमारा हो बग़ैर उस के भी शायद ज़िंदगी हमको गवारा