दिल में रखता है न पलकों पे बिठाता…

dil me rakhta hai na palako pe bithata hai mujhe

दिल में रखता है न पलकों पे बिठाता है मुझे फिर भी एक शख्स में क्या क्या नज़र

हिज़्र के मौसम में ये बारिश का बरसना…

hizr ke mausam me ye baarish ka barsana kaisa

हिज़्र के मौसम में ये बारिश का बरसना कैसा ? एक सहरा में समन्दर का गुज़रना कैसा ?

क्यूँ पत्थर को दिल में बसाए बैठे हो ?

kyun patthar ko dil me basaye baithe ho

क्यूँ पत्थर को दिल में बसाए बैठे हो ? वो अपना था ही नहीं जिसे अपना बनाए बैठे

आज सीलिंग फैन से लटकी हुई है

aaj sealing fain se latki hui hai

आज सीलिंग फैन से लटकी हुई है ये मुहब्बत किस कदर भटकी हुई है, गैरो के कंधो पर

ढूँढ़ते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी

dhoondhte kya ho in aankhon me kahani meri

ढूँढ़ते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी ख़ुद में गुम रहना तो आदत है पुरानी मेरी, भीड़

सितमगरों के सितम की उड़ान कुछ…

sitamgaro ke sitam ki udaan kuch kam hai

सितमगरों के सितम की उड़ान कुछ कम है अभी ज़मीं के लिए आसमान कुछ कम है, जो इस

मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ…

main ise odhta bichhata hoo wo gazal aapko sunata hoon

मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ, एक जंगल है तेरी आंखों में मैं जहाँ

नहीं होती अगर बारिश तो पत्थर हो…

nahi hoti agar barish to patthar ho gaye hote

नहीं होती अगर बारिश तो पत्थर हो गए होते ये सारे लहलहाते खेत बंज़र हो गए होते, तेरे

सहर ने अंधी गली की तरफ़ नहीं देखा

sahar ne andhi gali ki taraf nahi dekha

सहर ने अंधी गली की तरफ़ नहीं देखा जिसे तलब थी उसी की तरफ़ नहीं देखा, क़लक़ था

हमारे दिल पे जो ज़ख़्मों का बाब लिखा है

hamare dil pe zakhmo ka jo bab likha hai

हमारे दिल पे जो ज़ख़्मों का बाब लिखा है इसी में वक़्त का सारा हिसाब लिखा है, कुछ