खंज़र से करो बात न तलवार से पूछो

khanzar se karo baat na talwar se pucho

खंज़र से करो बात न तलवार से पूछो मैं क़त्ल हुआ कैसे मेरे यार से पूछो, फर्ज़ अपना

ज़ख़्म का मरहम दर्द का अपने दरमाँ…

zakhm ka marham dard ka darma apne

ज़ख़्म का मरहम दर्द का अपने दरमाँ बेच के आए हैं हम लम्हों का सौदा कर के सदियाँ

धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल रोने…

dharti par jab khoon bahta hai badal rone lagta hai

धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल रोने लगता है देख के शहरों की वीरानी जंगल रोने लगता

नशात ए ग़म भी मिला रंज ए शाद मानी

nashaat e gam bhi mila ranj e shaadmani bhi

नशात ए ग़म भी मिला रंज ए शाद मानी भी मगर वो लम्हे बहुत मुख़्तसर थे फ़ानी भी,

मशअल ए दर्द फिर एक बार जला ली

mashal e dard fir ek baar jala lee jaaye

मशअल ए दर्द फिर एक बार जला ली जाए जश्न हो जाए ज़रा धूम मचा ली जाए, ख़ून

नहीं रोक सकोगे जिस्म की इन परवाजों

rok nahi sakoge zism ki parwazo ko

नहीं रोक सकोगे जिस्म की इन परवाजों को बड़ी भूल हुई जो छेड़ दिया कई साज़ों को, कोई

छोटी छोटी बातों पर परिवार बदलते देखे

chhoti chhoti baaton par pariwar badlte dekhe

छोटी छोटी बातों पर परिवार बदलते देखे वक़्त ए ज़रूरत सब यार बदलते देखे, अब तो यकीन उठ

हादसों का शहर है संभल जाइए

haadso ka shahar hai sambhal jaaiye

हादसों का शहर है संभल जाइए कौन कब किस डगर है संभल जाइए, नेक रस्ते पे चलते हुए

क्यूँ ज़मीं है आज प्यासी इस तरह ?

kyun zamin hai aaj pyasi is tarah

क्यूँ ज़मीं है आज प्यासी इस तरह ? हो रही नदियाँ सियासी इस तरह, जान की परवाह किसे

लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार…

laga jab aks e abroo dekhne dildar paani men

लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार पानी में बहम हर मौज से चलने लगी तलवार पानी में,