कटा न कोह ए अलम हम से कोहकन की तरह
कटा न कोह ए अलम हम से कोहकन की तरह बदल सका न ज़माना तेरे चलन की तरह,
Life Status
कटा न कोह ए अलम हम से कोहकन की तरह बदल सका न ज़माना तेरे चलन की तरह,
हमारे हाल से कोई जो बा ख़बर रहता ख़याल उसका हमें भी तो उम्र भर रहता, जिसे भी
कुछ इस अदा से वो मेरे दिल ओ नज़र में रहा ब क़ैद ए होश भी मैं आलम
ख़बर नहीं कि सफ़र है कि है क़याम अभी तिलिस्म ए शहर में खोए हैं ख़ास ओ आम
उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या दाग़ ही देंगे मुझ को दान में क्या मेरी हर बात बे असर
क़ैद शीशे में रहूँ अक्स बनूँ शाद रहूँ या कि फिर फोड़ के ये आइना आज़ाद रहूँ यूँ
किसी को नींद मिली तो किसी को ख़्वाब मिला हर एक बशर को याँ मौक़ा ए इंतिख़ाब मिला,
हम अब क्या बताएँ कहाँ तक गए गुमाँ के मुसाफ़िर गुमाँ तक गए, हिसार ए जहाँ तक है
ये जिस्म मेरा थक के बहुत चूर हुआ है किस कार ए मुसलसल पे ये मामूर हुआ है
कोई हसरत कोई अरमान नहीं रखते हैं हम तो मुद्दत से ये सामान नहीं रखते हैं, ज़ख़्म रखते