वही बहाना बना है उदास होने का…

bahut guman tha mausam shanas hone ka

बहुत गुमान था मौसम शनास होने का वही बहाना बना है उदास होने का, बदन को काढ़ लिया

मेरे नग़्मात को अंदाज़ ए नवा याद नहीं…

hai dua yaad magar hraf e dua

है दुआ याद मगर हर्फ़ ए दुआ याद नहीं मेरे नग़्मात को अंदाज़ ए नवा याद नहीं, मैं

चराग़ ए तूर जलाओ बड़ा अँधेरा है…

wo mere haal pe roya bhi muskuraya bhi

चराग़ ए तूर जलाओ बड़ा अँधेरा है ज़रा नक़ाब उठाओ बड़ा अँधेरा है, अभी तो सुब्ह के माथे

भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए…

bhuli hui sada hoo mujhe

भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए तुम से कहीं मिला हूँ मुझे याद कीजिए, मंज़िल नहीं हूँ

ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं…

gam ke muzrim khushi ke

ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं लोग अब ज़िंदगी के मुजरिम हैं, और कोई गुनाह याद नहीं

हारे हुए नसीब का मयार देख कर

haare-hue-nasib-ka

हारे हुए नसीब का मयार देख कर वो चल पड़ा है इश्क़ का अख़बार देख कर, आयेंगी काम

उसमें कोई रईस मुज़रिम था

usme koi raies muzrim

उसमें कोई रईस मुज़रिम था जो कहानी नहीं सुनाई गई, एक मय्यत ज़मीं तले उतरी एक मय्यत नहीं

तुम्हारी सोच, तुम्हारे गुमाँ से बाहर हम

tumhari-soch-tumhare-gumaan

तुम्हारी सोच, तुम्हारे गुमाँ से बाहर हम खड़े हुए है सफ ए दोस्तां से बाहर हम, हमें ही

पूछो अगर तो करते है इन्कार सब के सब

pucho-agar-to-karte

पूछो अगर तो करते है इन्कार सब के सब सच ये कि है हयात से बेज़ार सब के

वफ़ादारी पे दे दी जान मगर ग़द्दारी नहीं आई

wafadari pe de di

वफ़ादारी पे दे दी जान मगर ग़द्दारी नहीं आई हमारे खून में अब तक ये बीमारी नहीं आई,