अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन…

ab ke rut badali to khushboo ka safar dekhega kaun

अब के रुत बदली तो ख़ुशबू का सफ़र देखेगा कौन ज़ख़्म फूलों की तरह महकेंगे पर देखेगा कौन

एक दिन ख़ुद को अपने पास बिठाया हमने…

हैरतों के सिलसिले सोज़

एक दिन ख़ुद को अपने पास बिठाया हमने पहले यार बनाया फिर समझाया हमने, ख़ुद भी आख़िर कार

बरसों जुनूँ सहरा सहरा भटकाता है…

zakhm e tanhai me khushboo e hina kiski thi

बरसों जुनूँ सहरा सहरा भटकाता है घर में रहना यूँही नहीं आ जाता है, प्यास और धूप के

तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है न

teri khushiyo ka sabab yaar koi aur hai na

तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है न दोस्ती मुझ से और प्यार कोई और है न

ये चुभन अकेलेपन की, ये लगन उदास शब से…

ye chubhan akelepan ki

ये चुभन अकेलेपन की, ये लगन उदास शब से मैं हवा से लड़ रहा हूँ, तुझे क्या बताऊँ

जिनके घरो में आज भी चूल्हा नहीं जला…

khana gar ham unko khilaye to eid hai

जिनके घरो में आज भी चूल्हा नहीं जला खाना गर हम उनको खिलाएँ तो ईद है, पानी नहीं

आया ही नहीं कोई बोझ अपना उठाने को…

aaya hi nahi koi bojh apna uthane ko

आया ही नहीं कोई बोझ अपना उठाने को कब तक मैं छुपा रखता इस ख़्वाब ख़ज़ाने को ?

अब इस मकाँ में नया कोई दर नहीं करना…

andhera zehan ka samt e safar jab khone lagta hai

अब इस मकाँ में नया कोई दर नहीं करना ये काम सहल बहुत है मगर नहीं करना, ज़रा

छोड़ो अब उस चराग़ का चर्चा बहुत हुआ…

ae dil ye teri zidd mujhe nadaani lagti hai

छोड़ो अब उस चराग़ का चर्चा बहुत हुआ अपना तो सब के हाथों ख़सारा बहुत हुआ, क्या बेसबब

सवाद ए शाम न रंग ए सहर को देखते हैं…

naa mili chhanv kahin yun to kai shazar mile

सवाद ए शाम न रंग ए सहर को देखते हैं बस एक सितारा ए वहशत असर को देखते