रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो

Rahiye ab aisi jagah

रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो हम सुख़न कोई न हो और हम ज़बाँ

इशरत ए क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना

Ishrat e qatra hai

इशरत ए क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना,

लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है

likh-likh-ke-aansoo

लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है अपने सुख़न को अपनी पहचान कर लिया है, आख़िर

न घर है कोई, न सामान कुछ रहा बाक़ी

naa-ghar-hai-koi

न घर है कोई, न सामान कुछ रहा बाक़ी नहीं है कोई भी दुनिया में सिलसिला बाक़ी, ये

हर्फ़ ए ताज़ा नई ख़ुशबू में लिखा चाहता है

Harf e taza nayi

हर्फ़ ए ताज़ा नई ख़ुशबू में लिखा चाहता है बाब एक और मोहब्बत का खुला चाहता है, एक

हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया

Hum ne hi lautne

हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया उसने भी भूल जाने का वादा नहीं किया, दुख ओढ़ते

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आए सवालों की तरह

Falsafe Ishq me pesh

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आए सवालों की तरह हम परेशाँ ही रहे अपने ख़यालों की तरह, शीशागर बैठे

ज़िंदगी तुझ को जिया है कोई अफ़्सोस नहीं

Zindagi tujh ko jiya

ज़िंदगी तुझ को जिया है कोई अफ़्सोस नहीं ज़हर ख़ुद मैं ने पिया है कोई अफ़्सोस नहीं, मैंने

पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाए हैं

Patthar ke khuda patthar

पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाए हैं तुम शहर ए मोहब्बत कहते हो

शायद मैं ज़िंदगी की सहर ले के आ गया

Shayad main zindagi ki

शायद मैं ज़िंदगी की सहर ले के आ गया क़ातिल को आज अपने ही घर ले के आ