सिखाया जो सबक़ माँ ने वो हर पल निभाता हूँ…

sikhaya jo sabaq maa ne wo har pal nibhata hoo

सिखाया जो सबक़ माँ ने वो हर पल निभाता हूँ मुसीबत लाख आये सब्र दिल को सिखाता हूँ,

खुल के मिलने का सलीक़ा उन्हें आता नहीं…

khul kar milne ka saliqa unhe aata nahi

खुल के मिलने का सलीक़ा उन्हें आता नहीं और मेरे क़रीब तो कोई चोर दरवाज़ा नहीं, वो समझते

एक दिन मुल्क के हर घर में उजाला होगा…

ek din mulq ke har ghar me ujala hoga

एक दिन मुल्क के हर घर में उजाला होगा हर शख्स यहाँ सबका भला चाहने वाला होगा, इंसानों

लोग कैसे है यहाँ के ? ये नगर कैसा है ?

log kaise hai yahan ke ye nagar kaisa hai

लोग कैसे है यहाँ के ? ये नगर कैसा है ? उनकी जादू भरी बातों में असर कैसा

तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की…

tinka tinka kaante tode saari raat karai ki

तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की क्यूँ इतनी लम्बी होती है चाँदनी रात जुदाई की ?

सहमा सहमा डरा सा रहता है…

sahma sahma dara saa rahta hai

सहमा सहमा डरा सा रहता है जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है, काई सी जम गई है

शाम से आज साँस भारी है…

shaam se aaj saans bhari hai

शाम से आज साँस भारी है बे क़रारी सी बे क़रारी है, आपके बाद हर घड़ी हमने आपके

ज़हर के घूँट भी हँस हँस के पीये जाते है…

zahar-ke-ghoont-bhi

ज़हर के घूँट भी हँस हँस के पीये जाते है हम बहरहाल सलीक़े से जीये जाते है, एक

कितना बेकार तमन्ना का सफ़र होता है…

kitna bekar tamanna ka safar hota hai

कितना बेकार तमन्ना का सफ़र होता है कल की उम्मीद पे हर आज बसर होता है, यूँ मैं

इंशा जी उठा अब कूच करो, इस शहर में जी का लगाना क्या…

insha jee utha ab kooch karo

इंशा जी उठा अब कूच करो, इस शहर में जी का लगाना क्या वहशी को सुकूं से क्या