ठोकरें खा के सँभलना नहीं आता है मुझे

thokare-khaa-ke-sambhlna

ठोकरें खा के सँभलना नहीं आता है मुझे चल मेरे साथ कि चलना नहीं आता है मुझे, अपनी

तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता…

tu mujhko jo is shahar me laya nahi hota

तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता मैं बे सर ओ सामाँ कभी रुस्वा नहीं

राहें वही खड़ी थी मुसाफ़िर भटक गया…

raahe wahi khadi thi musafir bhatak gaya

राहें वही खड़ी थी मुसाफ़िर भटक गया एक लफ्ज़ आते आते लबो तक अटक गया, जिस पेड़ की

ये सच है कि हम लोग बहुत आसानी में रहें…

ye sach hai ki ham log bahut asaani me rahe

ये सच है कि हम लोग बहुत आसानी में रहें पर नाम वही कर गए जो बख्त गिरानी

कभी दादी कभी नानी से अलग कर दिए गए…

kabhi dadi kabhi naani se alag kar diye gaye

कभी दादी कभी नानी से अलग कर दिए गए बच्चे परियों की कहानी से अलग कर दिए गए,

कुछ ख़ुद भी थे अफ़सुर्दा से…

kuch ham bhi the afsurda se kuch log bhi hamse ruth gaye

कुछ ख़ुद भी थे अफ़सुर्दा से कुछ लोग भी हमसे रूठ गए, कुछ ख़ुद भी ज़ख्म के आदी

काम इस दिल की तबाही से लिया क्या जाए…

kaam is dil ki tabahi se kya liya jaaye

काम इस दिल की तबाही से लिया क्या जाए सोचता हूँ कि ख़राबे में किया क्या जाए ?

इश्क़ सहरा है कि दरियाँ कभी सोचा तुमने…

adhure khwabo ki anokhi

इश्क़ सहरा है कि दरियाँ कभी सोचा तुमने तुझसे क्या है मेरा नाता कभी सोचा तुमने ? हाँ

दोस्तों ! आज दिल में छुपे कुछ राज़ बयाँ करता हूँ…

dil me chupe kuch raaj bayan karta hoo

दोस्तों ! आज मैं दिल में छुपे कुछ राज़ बयाँ करता हूँ दुःख से जुड़े ग़ुरबत के दिनों

एक मंज़र यूं नजर आया कि मैं भी डर गया…

ek manzar yun nazar aaya ki main bhi dar gaya

  एक मंज़र यूं नजर आया कि मैं भी डर गया हाथ में रोटी थी जिसके वो भिखारी