जब से तेरी हर बात में रहने लगे
जब से तेरी हर बात में रहने लगे दुश्मन मेरे औक़ात में रहने लगे, ये बात भी उनको
Hindi Shayari
जब से तेरी हर बात में रहने लगे दुश्मन मेरे औक़ात में रहने लगे, ये बात भी उनको
कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से क्या कहता ? सबब ए रंज़ ओ गम जो है उसी
दिल की बस्ती पे किसी दर्द का साया भी नहीं ऐसा वीरानी का मौसम कभी आया भी नहीं,
फ़िराक़ ओ वस्ल से हट कर कोई रिश्ता हमारा हो बग़ैर उस के भी शायद ज़िंदगी हमको गवारा
किया इश्क था जो बाइसे रुसवाई बन गया यारो तमाम शहर तमाशाई बन गया, बिन माँगे मिल गए
तजुर्बे के दम पर दीवानों ने कहा था इश्क़ बुरा है मगर जुनूँ ए इश्क़ में ये बात
बस एक बार किसी ने गले लगाया था फिर उस के बाद न मैं था न मेरा साया
किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई ऐ मेरे ख़ुदा नफ़रत ही दे रही है दिखाई ऐ मेरे ख़ुदा,
एहसास ए इश्क़ दिल की पनाहों में आ गया बादल सिमट के चाँद की बाहोँ में आ गया,
हक़ीर जानता है इफ्तिखार माँगता है वो ज़हर बाँटता है और प्यार माँगता है, ज़लील कर के रख