बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है
बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है हर आदमी में कोई दूसरा भी होता है, तुम अपने
Ghazals
बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है हर आदमी में कोई दूसरा भी होता है, तुम अपने
गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया, एक इश्क़
अजल होती रहेगी इश्क़ कर के मुल्तवी कब तक मुक़द्दर में है या रब आरज़ू ए ख़ुदकुशी कब
जो हमारे सफ़र का क़िस्सा है वो तेरी रहगुज़र का क़िस्सा है, सुब्ह तक ख़त्म हो ही जाएगा
जवानी ज़िंदगानी है न तुम समझे न हम समझे ये एक ऐसी कहानी है न तुम समझे न
उस को भी हम से मोहब्बत हो ज़रूरी तो नहीं इश्क़ ही इश्क़ की क़ीमत हो ज़रूरी तो
सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतिबार आप के वादे पर कर लिया बात तो सिर्फ़ एक रात की
बिछड़ के उन के हम इस एहतिमाल से भी गए बयान ए ग़म से गए अर्ज़ ए हाल
जज़्बात का ख़ामोश असर देख रहा हूँ बेचैन है दिल आँख को तर देख रहा हूँ, ख़ाकिस्तर ए
ख़ुशबू गुलों में तारों में ताबिंदगी नहीं तुम बिन किसी भी शय में कोई दिलकशी नहीं, जब तुम