चराग़ इश्क़ के दिल में जलाए जाते हैं
चराग़ इश्क़ के दिल में जलाए जाते हैं बड़े ही शौक़ से सदमे उठाए जाते हैं, उन्हें सुकून
Ghazals
चराग़ इश्क़ के दिल में जलाए जाते हैं बड़े ही शौक़ से सदमे उठाए जाते हैं, उन्हें सुकून
बड़ी मुश्किल हैं राहें सुन मोहब्बत की ज़माने में कि पल पल मरना पड़ता है इसे दिल से
दोनों में थी हवस कि मोहब्बत तो थी नहीं यानी वफ़ा की उनको ज़रूरत तो थी नहीं, अच्छा
इश्क़ की राह में यूँ हद से गुज़र मत जाना हों घड़े कच्चे तो दरिया में उतर मत
फूल से मासूम बच्चों की ज़बाँ हो जाएँगे मिट भी जाएँगे तो हम एक दास्ताँ हो जाएँगे, मैंने
सुनो ये ग़म की सियह रात जाने वाली है अभी अज़ान की आवाज़ आने वाली है, तुझे यक़ीन
भूले बिसरे हुए ग़म याद बहुत करता है मेरे अंदर कोई फ़रियाद बहुत करता है, रोज़ आता है
ज़िंदगी से यही गिला है मुझे तू बहुत देर से मिला है मुझे, तू मोहब्बत से कोई चाल
ज़माने की हवा बदली उधर रंग ए चमन बदला गुलों ने जब रविश बदली अनादिल ने वतन बदला,
हर तरफ़ महकी हुई मेरे चमन की ख़ुशबू है फ़ज़ाओ में अज़ानों की भजन की ख़ुशबू, मुझ को