पढ़िए सबक़ यही है वफ़ा की किताब का

padhiye sabaq yahi hai

पढ़िए सबक़ यही है वफ़ा की किताब का काँटे करा रहे हैं तआरुफ़ गुलाब का, कैसा ये इंतिशार

उदासी आसमाँ है दिल मिरा कितना अकेला है

udaasi aasmaan hai dil

उदासी आसमाँ है दिल मिरा कितना अकेला है परिंदा शाम के पुल पर बहुत ख़ामोश बैठा है, मैं

घर से निकले अगर हम बहक जाएँगे

ghar se nikale agar

घर से निकले अगर हम बहक जाएँगे वो गुलाबी कटोरे छलक जाएँगे, हम ने अल्फ़ाज़ को आइना कर

दिल करे जब आप का मुझ को रुलाया कीजिए

dil kare jab aap

दिल करे जब आप का मुझ को रुलाया कीजिए आप ग़म की ये दवा मेरे ख़ुदारा कीजिए, लुत्फ़

अपने लिए रहा कभी उस के रहा ख़िलाफ़

apne liye raha kabhi

अपने लिए रहा कभी उस के रहा ख़िलाफ़ मेरा मिज़ाज सब के लिए एक सा ख़िलाफ़, ऐसे भी

देखे हैं दिल नशीन मनाज़िर हिजाब के

dekhe hain dil nashin

देखे हैं दिल नशीन मनाज़िर हिजाब के होते हैं रंग सैंकड़ों पागल जो ख़्वाब के, ख़ुशबू जिसे समझते

चलिए मुश्किल है अगर जीना तो मर जाते हैं

chaliye mushkil hai agar

चलिए मुश्किल है अगर जीना तो मर जाते हैं बोझ हम रूह पे अपनी हैं उतर जाते हैं,

जलता रहा मैं रात की तन्हाइयों के साथ

jalta raha main raat

जलता रहा मैं रात की तन्हाइयों के साथ और तुम रहे हो सुब्ह की रानाइयों के साथ, ऐ

दिल में बस जान सा मैं रहता हूँ

dil me bas jaan

दिल में बस जान सा मैं रहता हूँ ख़ुद में मेहमान सा मैं रहता हूँ, कितने आबाद दिल

उस से मिला तो दिल मेंरा सरशार हो गया

us se mila to

उस से मिला तो दिल मेंरा सरशार हो गया और फिर बिछड़ के ख़ुद से ही बेज़ार हो