किसी की ना सुनिए ख़ुद की सुनाते जाइए

kisi ki naa suniye khud ki sunaate jaaiye

किसी की ना सुनिए ख़ुद की सुनाते जाइए आप जो है ख़ुद वही सबको बनाते जाइए, मुर्दा ज़मीरो

तुम्हारे आँसू कभी बहने न देंगे

tumhare aansoo kabhi bahne na denge

तुम्हारे आँसू कभी बहने न देंगे तुम्हे इस तरह उदास रहने न देंगे, तेरी नज़रों में हम बेवफ़ा

क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला ?

kya kare meri masihaai bhi karne wala

क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला ? ज़ख़्म ही ये मुझे लगता नहीं भरने वाला, ज़िंदगी से

मैं शाख़ से उड़ा था सितारों की आस में

main shaakh se uda tha sitaron ki

मैं शाख़ से उड़ा था सितारों की आस में मुरझा के आ गिरा हूँ मगर सर्द घास में,

तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई

tujhe kaise ilm na ho saka

तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई तेरे शहर ही की ये शाएरा

क्या ? खज़ूर के पेड़ो में झुकाव आ गया

kya khazoor ke pedo me jhukaav aa gaya

क्या ? खज़ूर के पेड़ो में झुकाव आ गया ज़नाब ! लगता है शहर में चुनाव आ गया,

गुलामी में काम आती शमशीरें न तदबीरें

gulami me kaam aati shamshiren

गुलामी में काम आती शमशीरें न तदबीरें जो हो ज़ौक ए यकीं पैदा तो कट जाती हैं जंज़ीरें,

लोग क्या ख़ूब वफ़ाओ का सिला देते है

log kya khoob wafaaon ka sila dete hain

लोग क्या ख़ूब वफ़ाओ का सिला देते है ज़िन्दगी के हर मोड़ पे ज़ख्म नया देते है, कैसे

दिल के हर दर्द ने अशआर में ढलना चाहा

dil ke har dard ne ashaar me dhalna chaha

दिल के हर दर्द ने अशआर में ढलना चाहा अपना पैराहन ए बे रंग बदलना चाहा, कोई अनजानी

जब छाई घटा लहराई धनक एक हुस्न ए मुकम्मल याद आया

jab chhaai ghata lahraai dhanak ek husn e muqammal

जब छाई घटा लहराई धनक एक हुस्न ए मुकम्मल याद आया उन हाथों की मेहंदी याद आई उन