वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता

wo shakhs ki main jis se mohabbat nahi karta

वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता हँसता है मुझे देख के नफ़रत नहीं करता, पकड़ा

ये तो नहीं कि तुम से मोहब्बत नहीं मुझे

ye to nahi ki tum se mohabbat nahi mujhe

ये तो नहीं कि तुम से मोहब्बत नहीं मुझे इतना ज़रूर है कि शिकायत नहीं मुझे, मैं हूँ

पुर्सिश ए ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं

pursish e gam ka shukriya kya tujhe aagahi nahi

पुर्सिश ए ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं तेरे बग़ैर ज़िंदगी दर्द है ज़िंदगी नहीं, देख के

यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे

yun na mil mujh se khafa ho jaise

यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे साथ चल मौज ए सबा हो जैसे, लोग यूँ देख

न सियो होंठ न ख़्वाबों में सदा दो हम को

na siyo honth na khwabon me sada do hum ko

न सियो होंठ न ख़्वाबों में सदा दो हम को मस्लहत का ये तक़ाज़ा है भुला दो हम

मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा

mere junoon ka nateeja zarur nikalega

मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा, गिरा दिया है तो साहिल पे

जो तेरे देखने से निकले हैं

jo tere dekhne se nikale hain

जो तेरे देखने से निकले हैं वो भी दिन क्या मज़े से निकले हैं, वो कहाँ नज़्र जाँ

फ़ज़ा में छाए हुए हैं उदास सन्नाटे

faza me chhaaye hue hai udaas sannate

फ़ज़ा में छाए हुए हैं उदास सन्नाटे हों जैसे ज़ुल्मत ए शब का लिबास सन्नाटे, तेरे ख़याल की

बरहना शाख़ों पे कब फ़ाख़ताएँ आती हैं

barhana shakhon pe kab faakhtayen aati hain

बरहना शाख़ों पे कब फ़ाख़ताएँ आती हैं मैं वो शजर हूँ कि जिस में बलाएँ आती हैं, ये

मेरी अना का असासा ज़रूर ख़ाक हुआ

meri anaa ka asasa zarur khaq hua

मेरी अना का असासा ज़रूर ख़ाक हुआ मगर ख़ुशी है कि तेरे हुज़ूर ख़ाक हुआ, मुझे बदन के