कोई जो रहता है रहने दो मस्लहत का शिकार

koi jo rahta hai rahne do maslahat ka shikaar

कोई जो रहता है रहने दो मस्लहत का शिकार चलो कि जश्न ए बहाराँ मनाएँगे सब यार, चलो

दो जवां दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं

do javaan dilo ka gam dooriyan samjhti hain

दो जवां दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं, तुम तो खुद

ताक़तें तुम्हारी हैं और ख़ुदा हमारा है

taaqten tumhari hain aur khuda humara hai

ताक़तें तुम्हारी हैं और ख़ुदा हमारा है अक्स पर न इतराओ आईना हमारा है, आप की ग़ुलामी का

आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई

aankh bhar aayi kisi se jo mulaqat hui

आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई, दिन भी

ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है

zulf o rukh ke saaye me zindagi guzari hai

ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है धूप भी हमारी है छाँव भी हमारी है, ग़म

ख़याल ओ ख़्वाब में होना सदा ए बाद में रहना

khyal o khwab me hona sada e baad me rahna

ख़याल ओ ख़्वाब में होना सदा ए बाद में रहना किसी की आस में जीना किसी की याद

रात दरपेश थी मुसाफ़िर को

raat darpesh thi musafir ko neend kyo aa gayi

रात दरपेश थी मुसाफ़िर को नींद क्यों आ गई मुसाफ़िर को ? क्या नगर है ये दिल दिखाई

हिज्र के मौसम ए तन्हाई के दुख देखे

hizr ke mausam e tanhaai ke dukh dekhe

हिज्र के मौसम ए तन्हाई के दुख देखे एक चेहरे के पीछे कितने दुख देखे, एक सन्नाटा पहरों

ये क्या रुत है अब की रुत में देखें ज़र्द गुलाब

ye kya rut hai ab kee rut me dekhe zard gulab

ये क्या रुत है अब की रुत में देखें ज़र्द गुलाब चेहरे सूखे फूल ख़िज़ाँ के आँखें ज़र्द

गर्दिश ए साग़र सुबू के दरमियाँ

gardish e sagar subu ke darmiyan

गर्दिश ए साग़र सुबू के दरमियाँ ज़िंदगी है हाओ हू के दरमियाँ, ज़ख़्म और पोशाक भी रखे गए