कहीं क़बा तो कहीं आस्तीं बिछाते हुए

kahin qaba to kahin

कहीं क़बा तो कहीं आस्तीं बिछाते हुए मैं मर गया हूँ वफादारियाँ निभाते हुए, अज़ीब रात थी आँखे

वफ़ादारी पे दे दी जान मगर ग़द्दारी नहीं आई

wafadari pe de di

वफ़ादारी पे दे दी जान मगर ग़द्दारी नहीं आई हमारे खून में अब तक ये बीमारी नहीं आई,

वो कौन है जो गम का मज़ा जानते नहीं

wo-kaun-hai-jo

वो कौन है जो गम का मज़ा जानते नहीं बस दूसरों के दर्द को ही पहचानते नहीं, इस

आवाम भूख से देखो निढाल है कि नहीं ?

awaam bhookh se dekho

आवाम भूख से देखो निढाल है कि नहीं ? हर एक चेहरे से ज़ाहिर मलाल है कि नहीं

बस एक ही हल इसका हमारे पास है लोगो

bas-ek-hi-hal

बस एक ही हल इसका हमारे पास है लोगो जो हुक्मराँ बिक जाए वो बकवास है लोगो, किस

चुनाव से पहले मशरूफ़ होते है सारे ही उम्मीदवार…

चुनाव से पहले मशरूफ़

चुनाव से पहले मशरूफ़ होते है सारे ही उम्मीदवार दिन रात मीटिंगे होती है इन सबके प्यादे और

जानते सब है मुझे, पहचानता कोई नहीं

ashna hote hue bhi

आशना होते हुए भी आशना कोई नहीं जानते सब है मुझे, पहचानता कोई नहीं, तन्हा मेरे ज़िम्मे क्यूँ

ज़िन्दा रहें तो क्या है जो मर जाएँ हम तो क्या

zinda-rahe-to-kya

ज़िन्दा रहें तो क्या है जो मर जाएँ हम तो क्या दुनियाँ से ख़ामोशी से गुज़र जाएँ हम

वतन की सर ज़मी से इश्क़ ओ उल्फ़त ही नहीं

watan ki sar zamin

वतन की सर ज़मी से इश्क़ ओ उल्फ़त ही नहीं खटकती जो रहे दिल में वो हसरत हम

कितने ही पेड़ ख़ौफ़ ए ख़िज़ाँ से उजड़ गए…

कितने ही पेड़ ख़ौफ़

कितने ही पेड़ ख़ौफ़ ए ख़िज़ाँ से उजड़ गए कुछ बर्ग ए सब्ज़ वक़्त से पहले ही झड़