जब भी हँसी की गर्द में चेहरा छुपा लिया
जब भी हँसी की गर्द में चेहरा छुपा लिया बे लौस दोस्ती का बड़ा ही मज़ा लिया, एक
General Poetry
जब भी हँसी की गर्द में चेहरा छुपा लिया बे लौस दोस्ती का बड़ा ही मज़ा लिया, एक
कौन है नेक ? कौन बद है यहाँ ? किसी के हाथों में ये सनद है कहाँ ?
बुरी है कीजिए नफ़रत निहायत मिटाए दिल से सदियों की अदावत चलो हम एक हो जाएँ, वो क्या
हमेशा साथ रहने की आदत कुछ नहीं होती जो लम्हा मिल गए जी लो, रियाज़त कुछ नहीं होतीं,
तेरी जुल्फें बिखरने को घटा कह दूँ तो कैसा हो ? तेरे आँचल के उड़ने को सबा कह
एक पल में एक सदी का मज़ा हम से पूछिए एक पल में एक सदी का मज़ा हम
चौंक चौंक उठती है महलों की फ़ज़ा रात गए चौंक चौंक उठती है महलों की फ़ज़ा रात गए
ज़माना आज नहीं डगमगा के चलने का ज़माना आज नहीं डगमगा के चलने का सम्भल भी जा कि
ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही
तुझ से बिछड़ के हम भी मुक़द्दर के हो गए फिर जो भी दर मिला है उसी दर