तुख़्म ए नफ़रत बो रहा है आदमी…

tukhm e nafrat bo raha hai aadmi

तुख़्म ए नफ़रत बो रहा है आदमी आदमियत खो रहा है आदमी, ज़िंदगी का नाम है जेहद ए

ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो…

zindagi-ye-to-nahi-tujhko-sanvara-hi-naa-ho

ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो कुछ न कुछ हम ने तेरा क़र्ज़ उतारा

ज़िंदगी तुझ को भुलाया है बहुत दिन हमने…

zindagi tujhko bhulaya hai bahut din hamne

ज़िंदगी तुझ को भुलाया है बहुत दिन हमने वक़्त ख़्वाबों में गँवाया है बहुत दिन हमने, अब ये

अगर सफ़र में मेरे साथ मेरा यार चले…

agar safar me mere saath mera yaar chale

अगर सफ़र में मेरे साथ मेरा यार चले तवाफ़ करता हुआ मौसम ए बहार चले, लगा के वक़्त

बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच..

budha tappar tuta chhappar aur uspar barsate sach

बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच उसने कैसे काटी होंगी, लंबी लंबी रातें सच, लफ़्जों

ये नफ़रतो की सदाएँ, वतन का क्या होगा ?

is bahte hue lahoo me

ये नफ़रतो की सदाएँ, वतन का क्या होगा ? हवा में आग बही, तो चमन का क्या होगा

ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई…

le gaya dil me daba kar raaz koi

ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई पानियों पे लिख गया आवाज़ कोई, बाँध कर मेरे परो

सता लें हमको दिलचस्पी जो है उनकी सताने में…

sata le hamko jo dilchaspi hai unhe hamko satane me

सता लें हमको दिलचस्पी जो है उनकी सताने में हमारा क्या वो हो जाएँगे रुस्वा ख़ुद ज़माने में,

हिज़रतो का ज़माना भी क्या ज़माना है…

hizrato ka zamana bhi kya zamana hai

हिज़रतो का ज़माना भी क्या ज़माना है उन्ही से दूर है जिनके लिए कमाना है, ख़ुशी ये है

समझ रहे थे कि अपनी सुधर गई दुनियाँ…

समझ रहे थे कि अपनी सुधर गई दुनियाँ हमें तो मुफ़्त में बदनाम कर गई दुनियाँ, मुतालबों से