तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता…
तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता मैं बे सर ओ सामाँ कभी रुस्वा नहीं
Gazals
तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता मैं बे सर ओ सामाँ कभी रुस्वा नहीं
तुम कुछ भी करो होश में आने के नहीं हम हैं इश्क़ घराने के ज़माने के नहीं हम,
तुम्हें उससे मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते किसी दिन उसके दर पे रक़्स ए वहशत क्यूँ
राह ए इश्क़ के हर मोड़ पे परेशानियाँ होंगी बहारे ना सही मगर सदा ही वीरानियाँ होंगी, कहीं
पास आओ एक इल्तज़ा सुन लो प्यार है तुमसे बेपनाह सुन लो, एक तुम्ही को ख़ुदा से माँगा
मुहब्बत जो हकीकी हो तो क़िस्मत ही सँवर जाती मुहब्बत जो मिजाज़ी हो तो उलझन औद कर आती,
राहें वही खड़ी थी मुसाफ़िर भटक गया एक लफ्ज़ आते आते लबो तक अटक गया, जिस पेड़ की
ये सच है कि हम लोग बहुत आसानी में रहें पर नाम वही कर गए जो बख्त गिरानी
तू कभी आ देख कभी साथ तों चलमेरे तसव्वुर की दुनियाँ बहुत हसीन है, यहाँ हवा जो चलती
कभी दादी कभी नानी से अलग कर दिए गए बच्चे परियों की कहानी से अलग कर दिए गए,