दिल चाहे कि आज कुछ सुनहरा लिखूँ

dil-chahe-ki-aaj

दिल चाहे कि आज कुछ सुनहरा लिखूँ मैं ज़ात पे मेरी एक पैरा लिखूँ, मैं लिखूँ हयात सारी

उधर की शय इधर कर दी गई है

udhar-ki-shay-idhar

उधर की शय इधर कर दी गई है ज़मीं ज़ेर ओ ज़बर कर दी गई है, ये काली

तुम साथ चले थे तो मेरे साथ चला दिन

tum-saath-chale-the

तुम साथ चले थे तो मेरे साथ चला दिन तुम राह से बिछड़े थे कि बस डूब गया

किस तवक़्क़ो’ पे क्या उठा रखिए ?

kis-tavaqqo-pe-kya

किस तवक़्क़ो’ पे क्या उठा रखिए ? दिल सलामत नहीं तो क्या रखिए ? लिखिए कुछ और दास्तान

किस को मालूम है क्या होगा नज़र से पहले

kis-ko-malum-hai

किस को मालूम है क्या होगा नज़र से पहले होगा कोई भी जहाँ ज़ात ए बशर से पहले

क़दम रखता है जब रास्तो पे यार आहिस्ता आहिस्ता

qadam-rakhta-hai-jab

क़दम रखता है जब रास्तो पे यार आहिस्ता आहिस्ता तो छट जाता है सब गर्द ओ ग़ुबार आहिस्ता

सवालो के बदले लहज़े ऐसे…

sata le hamko jo dilchaspi hai unhe hamko satane me

सवालो के बदले लहज़े ऐसे कि हमें जानते ही न हो जैसे, मिजाज़ मौसम भी न बदले वो

फ़ुगा है या दुआ है कौन जाने

fuga-hai-ya-dua

फ़ुगा है या दुआ है कौन जाने सदाए दर्द क्या है कौन जाने ? ख़िरद पहना न दे

खफ़ा मत हो अभी तो प्यार के दिन है

khafa-mat-ho-abhi

खफ़ा मत हो अभी तो प्यार के दिन है इब्तिदा ए मुहब्बत में अभी मल्हार के दिन है,

जितने हरामखोर थे क़ुर्ब ओ जवार में

jitne-haramkhor-the-kurb

जितने हरामखोर थे क़ुर्ब ओ जवार में परधान बनके आ गए अगली क़तार में, दीवार फाँदने में यूँ