चाँद है ज़ेर ए क़दम सूरज खिलौना…

chaand hai zer e nazar sooraj khilauna ho gaya

चाँद है ज़ेर ए क़दम सूरज खिलौना हो गया हाँ, मगर इस दौर में क़िरदार बौना हो गया,

क्यूँ पत्थर को दिल में बसाए बैठे हो ?

kyun patthar ko dil me basaye baithe ho

क्यूँ पत्थर को दिल में बसाए बैठे हो ? वो अपना था ही नहीं जिसे अपना बनाए बैठे

धड़कन धड़कन यादों की बारात…

dhadkan dhadkan yaadon ki baraat akela kamra

धड़कन धड़कन यादों की बारात अकेला कमरा मैं और मेरे ज़ख़्मी एहसासात अकेला कमरा, गए दिनों की तस्वीरों

आज सीलिंग फैन से लटकी हुई है

aaj sealing fain se latki hui hai

आज सीलिंग फैन से लटकी हुई है ये मुहब्बत किस कदर भटकी हुई है, गैरो के कंधो पर

ढूँढ़ते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी

dhoondhte kya ho in aankhon me kahani meri

ढूँढ़ते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी ख़ुद में गुम रहना तो आदत है पुरानी मेरी, भीड़

भूख के एहसास को शेर ओ सुख़न…

bhookh ke ehsas ko sher o sukhan tak le chalo

भूख के एहसास को शेर ओ सुख़न तक ले चलो या अदब को मुफ़लिसों की अंजुमन तक ले

आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है जिंदगी

aap kahte hai saraapa gulmuhar hai zindagi

आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है जिंदगी हम ग़रीबों की नज़र में क़हर है जिंदगी, भुखमरी की धूप

हर शख्स को अल्लाह की रहमत नहीं…

har shakhs ko allah ki rahmat nahi milti

हर शख्स को अल्लाह की रहमत नहीं मिलती हाँ रिज्क तो मिल जाता है बरक़त नहीं मिलती, किस

वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई…

wo jiske hath me chhale hai pairo me bivaai hai

वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है उसी के दम से रौनक आपके बंगले में

न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के…

naa mahlon ki bulandi se naa lafzo ke nagine se

न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से तमद्दुन में निखार आता है घीसू के पसीने