हमारे सब्र के दामन को तार तार न कर

हमारे सब्र के दामन

हमारे सब्र के दामन को तार तार न कर निगाह ए जोक तलब इतना बे क़रार न कर,

मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात सिर्फ़ तुम से हैं

मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात

मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात सिर्फ़ तुम से हैं मेरे हमदम मेरी क़ायनात सिर्फ तुम से हैं, गैर महरम

फ़लक का हर सितारा रात की आँखों का मोती है

फ़लक का हर सितारा

फ़लक का हर सितारा रात की आँखों का मोती है जिसे शबनम सहर की शोख़ किरनों में पिरोती

सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से

सब जल गया जलते

सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से उठता है धुआँ दिल से निगाहों से जिगर से,

बेख़बर दुनिया को रहने दो ख़बर करते हो क्यूँ

बेख़बर दुनिया को रहने

बेख़बर दुनिया को रहने दो ख़बर करते हो क्यूँ दोस्तो मेरे दुखों को मुश्तहर करते हो क्यूँ ?

नहीं बदलता यहाँ कुछ भी आरज़ू से फ़क़त

नहीं बदलता यहाँ कुछ

नहीं बदलता यहाँ कुछ भी आरज़ू से फ़क़त नहीं बदलता यहाँ कुछ भी जुस्तजू से फ़क़त, मुझे यक़ीन

कभी फूलों कभी खारों से बचना

कभी फूलों कभी खारों

कभी फूलों कभी खारों से बचना कभी रक़ीब कभी यारों से बचना, जान बुझ कर धोखा न खा

हमारे जैसे तुम्हे ख़राबो में मिलेंगे

हमारे जैसे तुम्हे ख़राबो

हमारे जैसे तुम्हे ख़राबो में मिलेंगे धुल पड़ी कहीं किताबो में मिलेंगे, ज़फागर से किये वफ़ाओ में मिलेंगे

ये किसका कर रहा है इंतज़ार आदमी

ये किसका कर रहा

ये किसका कर रहा है इंतज़ार आदमी जब ख़ुद ही ला सकता है बहार आदमी, मिलता नहीं मुफ़्त

दर्द हो या कि रंज़ ओ गम हर हाल में मुस्कुराते चलो

दर्द हो या कि

दर्द हो या कि रंज़ ओ गम हर हाल में मुस्कुराते चलो गैरों की ख़ुशी की खातिर रस्म