जंगलों में जो ख़ुदा तितलियाँ महफ़ूज़ रखे

Junglon me jo khuda titliyan mahfooz rakhe

जंगलों में जो ख़ुदा तितलियाँ महफ़ूज़ रखे तो ज़माने में वही लड़कियाँ महफ़ूज़ रखे, मैं ने एक फ़स्ल

मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा

mujhe-yaqeen-hai-koi-raasta-to-nikalega

मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा अगर जो कुछ नहीं निकला ख़ुदा तो निकलेगा, मैं रेगज़ारों में

अपना तुम्हें बनाना था कह कर बना लिया

apna-tumhen-banana-tha-kah-kar-bana-liya

अपना तुम्हें बनाना था कह कर बना लिया तर्ज़ ए वफ़ा का एक नया दफ़्तर बना लिया, दुनिया

वस्ल की आख़िरी मंज़िल है फ़ना हो जाना

vasl-kee-aakhiri-manzil-hai-fana-ho-jaana

वस्ल की आख़िरी मंज़िल है फ़ना हो जाना तुझ से मिल कर तेरे बंदे का ख़ुदा हो जाना,

भटकता हूँ मगर खोया नहीं हूँ

bhatakta-hoon-magar-khoya-nahi-hoon

भटकता हूँ मगर खोया नहीं हूँ बनाई राह पे चलता नहीं हूँ, मुझे रंगने की कोशिश मत करो

दार ओ रसन पे हर कोई मंसूर तो नहीं

daar-o-rasan-pe-har-koi-mansoor-to-nahin

दार ओ रसन पे हर कोई मंसूर तो नहीं झुलसे हुए पहाड़ सभी तूर तो नहीं, ईसा नफ़स

मोहब्बत में शब ए तारीक ए हिज्राँ कौन देखेगा

mohabbat me shab e tareek e hizraan kaun dekhega

मोहब्बत में शब ए तारीक ए हिज्राँ कौन देखेगा हमीं देखेंगे ये ख़्वाब ए परेशाँ कौन देखेगा ?

शमअ से ये कह रही है ख़ाक ए परवाना अभी

shamaa se ye kah rahi hai khaaq e parwana abhi

शमअ से ये कह रही है ख़ाक ए परवाना अभी रात आख़िर हो गई बाक़ी है अफ़्साना अभी,

चुना था उन की मोहब्बत ने आज़मा के मुझे

chuna tha un kee mohabbat ne aazma ke mujhe

चुना था उन की मोहब्बत ने आज़मा के मुझे सुपुर्द ए ख़ाक किया आदमी बना के मुझे, मैं

बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए

badh kar kisi se haath milaane nahin gaye

बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए तेवर वही हैं अब भी पुराने नहीं गए, दालान अपनी