अज़ब ही मेरे मुल्क की कहानी है…

azab-hi-mere-mulq

अज़ब ही मेरे मुल्क की कहानी है यहाँ सस्ता खून पर महँगा पानी है, खिले है फूल कागज़

छोड़ के सब कुछ फक़त तुम इन्सान बनो…

achcha insan bano

बना के भेजा था उस रब ने अपना तर्जुमान तुम्हे छोड़ के सब कुछ फक़त तुम इन्सान बनो,

उसमें कोई रईस मुज़रिम था

usme koi raies muzrim

उसमें कोई रईस मुज़रिम था जो कहानी नहीं सुनाई गई, एक मय्यत ज़मीं तले उतरी एक मय्यत नहीं

दुआ तो दूर है अबतक सलाम आया नहीं…

teri taraf se koi bhi pyam

तेरी तरफ से कोई भी पयाम आया नहीं दुआ तो दूर है अबतक सलाम आया नहीं, मुझे तो

तुम्हारी सोच, तुम्हारे गुमाँ से बाहर हम

tumhari-soch-tumhare-gumaan

तुम्हारी सोच, तुम्हारे गुमाँ से बाहर हम खड़े हुए है सफ ए दोस्तां से बाहर हम, हमें ही

पूछो अगर तो करते है इन्कार सब के सब

pucho-agar-to-karte

पूछो अगर तो करते है इन्कार सब के सब सच ये कि है हयात से बेज़ार सब के

कहीं क़बा तो कहीं आस्तीं बिछाते हुए

kahin qaba to kahin

कहीं क़बा तो कहीं आस्तीं बिछाते हुए मैं मर गया हूँ वफादारियाँ निभाते हुए, अज़ीब रात थी आँखे

वफ़ादारी पे दे दी जान मगर ग़द्दारी नहीं आई

wafadari pe de di

वफ़ादारी पे दे दी जान मगर ग़द्दारी नहीं आई हमारे खून में अब तक ये बीमारी नहीं आई,

वो कौन है जो गम का मज़ा जानते नहीं

wo-kaun-hai-jo

वो कौन है जो गम का मज़ा जानते नहीं बस दूसरों के दर्द को ही पहचानते नहीं, इस

आवाम भूख से देखो निढाल है कि नहीं ?

awaam bhookh se dekho

आवाम भूख से देखो निढाल है कि नहीं ? हर एक चेहरे से ज़ाहिर मलाल है कि नहीं