हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए…

har qadam kahta hai tu aya hai jaane ke liye

हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए मंज़िल ए हस्ती नहीं है दिल लगाने के

ख़राब लोगो से भी रस्म ओ राह रखते थे…

kharab logo se bhi rasm o raah rakhte the

ख़राब लोगो से भी रस्म ओ राह रखते थे पुराने लोग गज़ब की निगाह रखते थे, ये और

सिखाया जो सबक़ माँ ने वो हर पल निभाता हूँ…

sikhaya jo sabaq maa ne wo har pal nibhata hoo

सिखाया जो सबक़ माँ ने वो हर पल निभाता हूँ मुसीबत लाख आये सब्र दिल को सिखाता हूँ,

खुल के मिलने का सलीक़ा उन्हें आता नहीं…

khul kar milne ka saliqa unhe aata nahi

खुल के मिलने का सलीक़ा उन्हें आता नहीं और मेरे क़रीब तो कोई चोर दरवाज़ा नहीं, वो समझते

अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं…

kuch ashaar mere yun to zamane ke liye hai

अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं कुछ शेर फकत उनको सुनाने के लिए हैं, अब ये

कोई चेहरा न हुआ रोशन न उजागर आँखें…

koi chehra na hua raushna na ujagar

कोई चेहरा न हुआ रोशन न उजागर आँखें आइना देख रही थीं मेरी पत्थर आँखें, ले उड़ी वक्त

इस तरह सताया है परेशान किया है…

is tarah sataya hai pareshan kiya hai

इस तरह सताया है परेशान किया है गोया कि मोहब्बत नहीं एहसान किया है, तुझको ही नहीं मुझ

न शब ओ रोज़ ही बदले है न हाल अच्छा है…

na shab o roz hi badle naa haal achcha hai

न शब ओ रोज़ ही बदले है न हाल अच्छा है किस ब्राह्मण ने कहा था कि ये

सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से…

sab jal gaya jalte hue khwabo ke

सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से उठता है धुआँ दिल से निगाहों से जिगर से,

एक दिन मुल्क के हर घर में उजाला होगा…

ek din mulq ke har ghar me ujala hoga

एक दिन मुल्क के हर घर में उजाला होगा हर शख्स यहाँ सबका भला चाहने वाला होगा, इंसानों