आए हैं सराए में तो घर जाएँगे क्या है

आए हैं सराए में तो घर जाएँगे क्या है
हम लोग किसी रोज़ गुज़र जाएँगे क्या है

हम पस्ता क़दों को तो बता देंगे बुलंदी
उड़ने से अगर अपने ये पर जाएँगे क्या है

तुम ने दिए तोहफ़े जो हमें अच्छे लगे हैं
ये ज़ख़्म ए दिल ए ज़ार तो भर जाएँगे क्या है

फूटेंगे किसी रोज़ अभी भरने दो इन को
ये तो हैं घड़े पाप के भर जाएँगे क्या है

~इरशाद अज़ीज़

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